चीन ने तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर दुनिया के सबसे बड़े डैम प्रोजेक्ट की योजना को सुरक्षित बताते हुए इसका बचाव किया है. दरअसल, तिब्बत में यारलुंग सांगपो (ब्रह्मपुत्र) नदी पर चीन की जल विद्युत परियोजना पर भारत की आपत्ति का चीन ने जवाब दिया है. इस परियोजना के तहत नदी पर एक बांध बनाया जाएगा जो दुनिया का सबसे बड़ा बांध होगा. इधर, चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ याकुन ने कहा है, "यारलुंग सांगपो (ब्रह्मपुत्र) नदी पर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की पूरी वैज्ञानिक समीक्षा की गई है.
चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, प्रवक्ता ने कहा है कि यह परियोजना इको सिस्टम और जियोलॉजी या निचले इलाकों में बसे देशों के पानी के अधिकार को प्रभावित नहीं करेगी. "इसके उलट यह परियोजना कुछ हद तक आपदा को रोकने और राहत में मदद कर सकती है. यह निचले इलाकों में जलवायु परिवर्तन को भी संतुलित कर सकता है.
China's construction of a hydropower project on the lower reaches of the Yarlung Zangbo River has undergone thorough scientific assessment, said Chinese Foreign Ministry spokesperson Guo Jiakun, adding that it will not negatively impact the ecological environment, geological… pic.twitter.com/DkYYWkOCg7
— Global Times (@globaltimesnews) January 6, 2025
चीन का बयान: वैज्ञानिक समीक्षा पूरी हुई
चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ याकुन ने इस परियोजना के बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा, "यारलुंग सांगपो नदी पर जल विद्युत परियोजना की पूरी वैज्ञानिक समीक्षा की गई है. उनका कहना था कि इस परियोजना का उद्देश्य इको-सिस्टम और निचले इलाकों में बसे देशों के पानी के अधिकारों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालना है.
परियोजना के लाभ: आपदा प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन
गुओ याकुन ने यह भी कहा कि इस परियोजना के सकारात्मक पहलू भी हैं. उनका कहना था, "इसके उलट, यह परियोजना कुछ हद तक आपदा को रोकने और राहत कार्यों में मदद कर सकती है. यह निचले इलाकों में जलवायु परिवर्तन को भी संतुलित कर सकता है. इस प्रकार, चीन ने परियोजना के पर्यावरणीय और जलवायु परिवर्तन से निपटने वाले लाभों को प्रमुख बताया.
परियोजना का लक्ष्य और स्थान
तिब्बत में बनने वाली इस जल विद्युत परियोजना का लक्ष्य सालाना 300 बिलियन किलोवाट-घंटा बिजली का उत्पादन करना है. इसे तिब्बत पठार के पूर्वी छोर पर स्थित यारलुंग सांगपो नदी पर बनाया जाएगा. यह परियोजना ऊर्जा उत्पादन के लिहाज से चीन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है, जबकि भारत ने इस परियोजना पर अपनी आपत्ति जताई है, यह दावा करते हुए कि यह परियोजना ब्रह्मपुत्र नदी के पानी के प्रवाह को प्रभावित कर सकती है, जो भारत के लिए जीवनदायिनी है.