अमेरिका से निकाले जाने के कुछ घंटे बाद आई मौत की आफत, वेनेजुएला में 1,700 से अधिक लोगों की मौत

अमेरिका से निर्वासित होकर स्वदेश लौटे 146 वेनेज़ुएलाई नागरिकों के लिए नई शुरुआत का सपना कुछ ही घंटों में भयावह त्रासदी में बदल गया. काराकास पहुंचने के बाद जिस होटल में उन्हें ठहराया गया था, वह दो शक्तिशाली भूकंपों की चपेट में आ गया.

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Shanu Sharma

अमेरिका से निर्वासित होकर अपने देश लौटे वेनेजुएला के नागरिकों के लिए घर वापसी राहत नहीं, बल्कि एक नई त्रासदी लेकर आई. मियामी से विशेष उड़ान के जरिए काराकास पहुंचे 146 लोगों को सरकार की ओर से अस्थायी रूप से एक होटल में ठहराया गया था. 

काराकास पहुंचने वालों में 19 महिलाएं और सात बच्चे भी शामिल थे. लेकिन रात होते-होते आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी. निर्वासन के बाद परिवार से मिलने और सामान्य जीवन शुरू करने की उम्मीद कर रहे कई लोग अचानक मलबे के नीचे दब गए. इस हादसे ने पूरे वेनेजुएला को गहरे शोक में डुबो दिया है.

दो शक्तिशाली भूकंपों से मची भारी तबाही

काराकास पहुंचने के कुछ समय बाद ही देश में 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो भीषण भूकंप आए. तेज झटकों से कई इमारतें धराशायी हो गईं और अनेक इलाकों में व्यापक तबाही हुई. सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में ला गुएरा भी शामिल रहा, जहां स्थित होटल भी भूकंप की चपेट में आ गया. सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 1,700 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. राहत और बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है.


मलबे से बाहर निकलने की दर्दनाक कहानी

भूकंप से जीवित बचीं 58 वर्षीय लिस्बेथ पोर्टिलो ने बताया कि वह होटल की दूसरी मंजिल पर अन्य महिलाओं के साथ ठहरी थीं. अचानक आए तेज झटकों से पूरी इमारत हिलने लगी और देखते ही देखते कमरे ढहने लगे. उन्होंने बताया कि एक भारी बीम के नीचे दबने के बावजूद किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहीं.

इसके बाद वह अन्य जीवित बचे लोगों के साथ कई किलोमीटर पैदल चलकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचीं. उनके अनुसार, होटल के बाहर का दृश्य बेहद भयावह था. लोग बिना जूते-चप्पलों के जान बचाकर भाग रहे थे और चारों ओर अफरा-तफरी का माहौल था. पोर्टिलो ने कहा कि यह उनके जीवन का दूसरा जन्म है और वह अब भी उस भयावह घटना के सदमे से बाहर नहीं निकल सकी हैं.

इस त्रासदी के बाद कई परिवार अब भी अपने परिजनों की तलाश में भटक रहे हैं. जिन लोगों को अमेरिका से निर्वासित किया गया था, उनमें से कई का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है. परिजन लगातार प्रशासन और राहत एजेंसियों से जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कई मामलों में अब भी स्पष्ट सूचना नहीं मिल सकी है. राहत अभियान जारी रहने के कारण लापता लोगों की वास्तविक स्थिति का पता लगाने में समय लग रहा है.