21 घंटे में ट्रंप-वेंस के बीच 12 बार बात, फिर भी फेल हुई US-ईरान डील! जानिए किस मुद्दे पर अटका समझौता?
अमेरिका-ईरान वार्ता के दौरान 21 घंटे में कई बार ट्रंप से बातचीत हुई, लेकिन परमाणु कार्यक्रम पर मतभेद के कारण बातचीत बेनतीजा रही. दोनों देशों ने एक-दूसरे पर अविश्वास का आरोप लगाया.
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई अहम वार्ता बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई. इस बातचीत में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे थे. उन्होंने खुलासा किया कि इस दौरान उनकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से लगातार बातचीत होती रही. बावजूद इसके, परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच गहरे मतभेद बने रहे, जिसके चलते बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी और माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है.
21 घंटे में लगातार संपर्क में रहे ट्रंप
वार्ता के दौरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि वह और उनकी टीम लगातार डोनाल्ड ट्रंप के संपर्क में थे. उन्होंने कहा कि पिछले 21 घंटों में उन्होंने कई बार ट्रंप से बात की, ताकि हर फैसले पर उनकी राय ली जा सके. इसके अलावा वेंस ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट और सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर से भी लगातार बातचीत की. इससे साफ है कि अमेरिका इस वार्ता को लेकर बेहद गंभीर था.
परमाणु कार्यक्रम बना सबसे बड़ा विवाद
अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर रहा. वेंस ने साफ कहा कि ट्रंप प्रशासन के लिए यह एक ‘रेड लाइन’ है. अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करे और परमाणु हथियार बनाने की दिशा में कोई कदम न उठाए. हालांकि ईरान ने इन मांगों को अस्वीकार कर दिया और कहा कि वह परमाणु हथियार बनाने की दिशा में काम नहीं कर रहा है.
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ईरान ने अमेरिका पर जताया अविश्वास
ईरान की ओर से भी इस वार्ता के विफल होने पर अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया गया. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने कहा कि उनकी तरफ से सकारात्मक पहल की गई थी, लेकिन अमेरिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता. उन्होंने यह भी कहा कि पिछले अनुभवों के कारण ईरान को अमेरिकी मंशा पर संदेह है. ईरान ने साफ संकेत दिया कि जब तक विश्वास बहाल नहीं होता, तब तक किसी भी समझौते की संभावना मुश्किल है.
बातचीत खत्म, लेकिन तनाव बरकरार
वार्ता के खत्म होने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है. ईरान ने स्पष्ट कर दिया कि वह अपने रुख से पीछे नहीं हटेगा, जबकि अमेरिका भी अपने लक्ष्य पर अडिग है. इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी स्थिति संवेदनशील बनी हुई है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है.
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