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जिनपिंग सरकार का बड़ा फैसला, भारत के साथ 1962 की जंग का इतिहास पढ़ेगा चीन

China News: चीन की जिनपिंग सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा की भावना को मजबूत करने के लिए बड़ा फैसला किया है. चीन सरकार ने स्कूली छात्रों के पाठ्यक्रम में बदलाव करते हुए साल 1962 की जंग को शामिल किया है. नए सेमेस्टर से छात्र इस बारे में पढ़ेंगे.

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India Daily Live

China News: चीन सरकार ने भारत के साथ साल 1962 में लड़ी गई जंग को स्कूली छात्रों के पाठ्यक्रम में शामिल करने का फैसला किया है. अगले महीने स्कूली छात्रों के लिए शुरू की जाने वाली नई चीनी इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में 1962 के भारत-चीन युद्ध के बारे में जानकारी शामिल की गई है.  मीडिया रिपोर्ट के जरिए बुधवार को यह जानकारी सामने आई है.  ताजा कदम चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की राजनीतिक और आर्थिक दर्शन की नीति से जुड़ा है जो चीनी नागरिकों को राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रेरित करता है. 

हांगकांग स्थित साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट एससीएमपी ने चीन के राष्ट्रीय प्रसारक सीसीटीवी (CCTV) का हवाला देते हुए कहा कि नए सिलेबस में साल 1979 के चीन वियतनाम युद्ध का भी उल्लेख किया गया है. यह पाठ्यक्रम सर्दियों में शुरु होने वाले नए सेमेस्टर में पहली और सातवीं कक्षा के छात्रों को पढ़ाया जाएगा. 

1962 का खूनी संघर्ष 

रिपोर्ट के अनुसार, नई इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में 1962 में चीन और भारत के बीच हुए संक्षिप्त खूनी संघर्ष को शामिल किया जाएगा. इसमें बताया जाएगा कि कैसे भारतीय सेना चार हफ्तों के अंदर हार गई और जंग समाप्त हो गई. हालांकि, किताबों में युद्ध के बारे में क्या और कितनी जानकारी होगी इसका विवरण साझा नहीं किया गया है. चीनी शिक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि नई सामग्री छात्रों को यह गहराई से समझने में मदद करेगी कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसकी सुरक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है.

सीमा पर तनाव जारी 

चीन सरकार का ताजा फैसला साल 2020 की गलवान घाटी की घटना से जोड़कर देखा जा रहा है. पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई खूनी झड़प के बाद हिमालयी पड़ोसियों के बीच संबंधों में तल्खी आई है. इस घटना के बाद द्विपक्षीय संबंध 1962 के युद्ध के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुँच गए.  कई दौर की कूटनीतिक और सैन्य वार्ताएँ चल रहे तनाव को पूरी तरह से हल करने में विफल रही हैं. दोनों देशों की ओर से एलएसी पर सैनिकों और हथियारों की भारी तैनाती की गई है.