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अब पृथ्वी से नहीं टकरा पाएगा कोई एस्टेरायड! चीन-यूक्रेन ने कर डाला बड़ा कमाल 

China Ukraine News: चीन और यूक्रेन के खगोलविदों ने पृथ्वी के निकट स्थित क्षुद्रगहों पर नजर रखने के लिए महत्वपूर्ण तकनीक का निर्माण कर लिया है. इस तकनीक की मदद से पृथ्वी को किसी संभावित नुकसान से बचाया जा सकेगा.

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 China Ukraine
Courtesy: Social Media

China Ukraine Collaboration: चीन और यूक्रेन की एक सहयोगी शोध टीम ने पृथ्वी के निकट स्थित क्षुद्रग्रहों (NEA) पर नजर रखने में महत्वपूर्ण प्रगति की है. इससे पृथ्वी पर संभावित जोखिमों का आकलन करने की क्षमता में सुधार हुआ है. लगातार रिसर्च करने के बाद खगोलविदों की टीम ने कहा कि वह एस्टेरॉयड के स्थानों को सटीक रूप से पहचानने और उसकी कक्षाओं का सटीक मैप बनाने में सक्षम हो  गई है. ऐसे एस्टेरॉयड जिनकी कक्षाएं पृथ्वी के समीप होती हैं उन्हें एनईए कहा जाता है. पृथ्वी से कम दूरी के कारण इनके धरती से टकराने की हमेशा आशंका रहती है. 

विकसित कर ली तकनीक 

नया शोध एनईए एस्टेरॉयड की कक्षाओं की निगरानी में वैज्ञानिकों की मदद करेगा. तेजी से गति करने वाले क्षुद्रग्रहों की सटीक ट्रैकिंग के लिए खगोलीय माप के दौरान छवियों को लेने के लिए बेहद कम समय मौजूद होता है.चीनी विज्ञान अकादमी के शंघाई खगोलीय वेधशाला (SHAO) और यूक्रेन की माइकोलाइव खगोलीय वेधशाला के रिसर्चर्स ने इस चुनौती का समाधान करने के लिए एक नई तकनीक का निर्माण कर लिया है.

इस तकनीक का नाम रोटेटिंग-ड्रिफ्ट-स्कैन (RDS) चार्ज-कपल्ड डिवाइस (CCD) है. यह तकनीक क्षुद्रग्रहों को लंबे समय तक एक्सपोज़र के साथ  उनके सोर्स  को भी मैप करने की अनुमति देता है. यह एस्टेरॉयड की मैपिंग और ट्रैकिंग में बड़ी भूमिका निभाएगा.  इस तकनीक के अंतर्गत खगोलविद इन एस्टेरॉयड की एक्यूरेट इमेज लेने में सक्षम हो सकेंगे. 

पृथ्वी को नुकसान से बचाएगा 

यह शोध एस्ट्रोनॉमिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है. इसमें कहा गया है कि यह प्रयोग एस्टेरॉयड का पता लगाने में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है. शोध में कहा गया कि छोटी दूरबीनों और RDS, CCD तकनीक का उपयोग करके एनईए एस्टेरॉयड की निगरानी करने में बड़ी मदद हासिल होगी. क्षुद्रग्रहों का पता लगाने वाला यह शोध पृथ्वी को इससे टकराने से बचाने में हमारी खासी मदद करेगा.