कनाडा में 'कॉम्बैटिंग हेट एक्ट' पास, खालिस्तानी झंडे और आतंकी प्रतीकों पर बैन; भारत के साथ रिश्तों में होगा सुधार!

कनाडाई संसद ने 'कॉम्बैटिंग हेट एक्ट' पास कर दिया है, जिसके तहत खालिस्तानी झंडे और आतंकी प्रतीकों पर प्रतिबंध लगाया जाएगा. धार्मिक स्थलों पर डराने-धमकाने पर भी सजा होगी. इसे भारत-कनाडा रिश्तों में अहम बदलाव माना जा रहा है.

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Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: कनाडा की संसद में पारित हुआ ‘कॉम्बैटिंग हेट एक्ट’ खालिस्तानी उग्रवाद पर सख्त कार्रवाई की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. इस बिल में आतंकवादी प्रतीकों के प्रदर्शन से लेकर धार्मिक स्थलों पर उत्पीड़न तक को अपराध की श्रेणी में रखा गया है. लंबे समय से खालिस्तानी चरमपंथ से परेशान भारतीय-कनाडाई समुदाय के लिए यह राहत की खबर है. साथ ही, भारत-कनाडा संबंधों में आए तनाव के बाद यह कदम दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है.

खालिस्तानी प्रतीकों पर कठोर प्रतिबंध

कनाडा के हाउस ऑफ कॉमन्स में पास हुए ‘कॉम्बैटिंग हेट एक्ट’ के तहत अब बब्बर खालसा और अन्य चरमपंथी समूहों के झंडे, पोस्टर और प्रचार सामग्री का सार्वजनिक प्रदर्शन पूरी तरह प्रतिबंधित होगा. सरकार का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर आतंकवाद के महिमामंडन को रोकना अब अनिवार्य हो गया है. यह कानून आतंकवादी विचारधाराओं को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त करेगा.

धार्मिक स्थलों पर उपद्रव अब अपराध

नए कानून में एक बड़ा बदलाव यह है कि अब मंदिरों और अन्य धार्मिक जगहों के बाहर लोगों को डराना, रोकना या जबरन बाधा डालना अपराध माना जाएगा. भारतीय समुदाय लंबे समय से ऐसे उपद्रवों का सामना करता रहा है. कई मंदिरों पर पहले भी खालिस्तानी ग्रुपों द्वारा तोड़फोड़ और धमकियों की घटनाएं सामने आती रही हैं. यह प्रावधान भारतीय मूल के कनाडाई नागरिकों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

धार्मिक छूट हटने पर विवाद बढ़ा

इस बिल में ‘धार्मिक छूट’ हटाने का फैसला सबसे अधिक बहस का विषय बना. पहले धार्मिक ग्रंथों के आधार पर कही गई कठोर बातों को हेट स्पीच नहीं माना जाता था, पर नए प्रावधान इसे खत्म करता है. कंजर्वेटिव और एनडीपी ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताया. हालांकि सरकार का दावा है कि यह बदलाव किसी की निजी आस्था को निशाना नहीं बनाता, बल्कि नफरत फैलाने वाले भाषणों को रोकने के लिए आवश्यक है.

भारतीय-कनाडाई समुदाय के लिए राहत

पिछले कई वर्षों से भारतीय-अध्युषित इलाकों में खालिस्तानी समर्थकों की गतिविधियां बढ़ गई थीं. मंदिरों में तोड़फोड़, धमकियां और विरोध प्रदर्शनों के चलते लोगों में असुरक्षा बढ़ रही थी. नया कानून ऐसे उग्रवादी समूहों पर नकेल कसने में मदद करेगा. समुदाय के कई संगठनों ने बिल को समर्थन देते हुए कहा कि यह लंबे समय से प्रतीक्षित कदम था.

भारत-कनाडा संबंधों में सुधार की शुरुआत

जस्टिन ट्रूडो के दौर में खालिस्तानी समूहों को मिली खुली छूट ने भारत-कनाडा संबंधों में गंभीर तनाव पैदा कर दिया था. अब मार्क कार्नी सरकार द्वारा उठाए गए कदम को इस दूरी को कम करने का प्रयास माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, खालिस्तानी गतिविधियों पर रोक भारत की प्रमुख मांग रही है और यह कदम भविष्य में दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा दे सकता है.