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BRICS का विचार सबसे पहले भारत तक कैसे पहुंचा? 11 साल में ऐसे बना चार देशों से बड़ा गठबंधन

BRICS आज दुनिया के बड़े उभरते देशों का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है, लेकिन इसकी शुरुआत इतनी बड़ी नहीं थी. इसकी शुरुआती सोच रूस में 1990 के दशक में विकसित हुई.

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Edited By: Reepu Kumari
BRICS का विचार सबसे पहले भारत तक कैसे पहुंचा? 11 साल में ऐसे बना चार देशों से बड़ा गठबंधन
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: BRICS सम्मेलन के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत 20 से ज्यादा देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रतिनिधि भारत पहुंच रहे हैं. आज यह समूह कई स्थायी सदस्यों और साझेदार देशों तक फैल चुका है. मगर इसकी शुरुआत एक छोटे रणनीतिक विचार से हुई थी. इसकी वैचारिक नींव 1996 से 1998 के बीच उस समय पड़ी, जब सोवियत संघ के टूटने के बाद रूस अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा था.

भारत के सामने रूस ने पहली बार क्या प्रस्ताव रखा था?

इसी दौर में रूस पश्चिमी देशों के बढ़ते प्रभाव के बीच ऐसा मंच चाहता था, जिससे वैश्विक मामलों में सत्ता के केंद्रों में विविधता लाई जा सके. रूस के विदेश मंत्रालय ने 1996 में इसकी अवधारणा सामने रखी. फिर 1998 में विदेश मंत्री येवगेनी प्रिमाकोव ने दिल्ली यात्रा के दौरान भारत के सामने रूस, भारत और चीन के रणनीतिक गठबंधन का विचार रखा. उस समय इसमें ब्राजील शामिल नहीं था और इसे मुख्य रूप से यूरेशियाई त्रिकोण के तौर पर देखा गया.

फिर आर्थिक ताकत ने बदली पूरे विचार की दिशा

BRICS की आर्थिक पहचान आगे चलकर अमेरिका के बैंक गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ'नील के शोध से मजबूत हुई. 2001 में उन्होंने BRIC शब्द का इस्तेमाल किया, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत और चीन को तेजी से बढ़ती उभरती अर्थव्यवस्थाओं के रूप में देखा गया. उनका तर्क था कि ये देश आने वाले दशकों में वैश्विक विकास और जीडीपी के बड़े केंद्र बन सकते हैं और पश्चिमी जी7 देशों के आर्थिक प्रभाव को चुनौती दे सकते हैं.

2006 में पहली बार चारों देशों ने साथ बैठकर बात की

रूस ने आर्थिक अवधारणा को राजनीतिक और कूटनीतिक मंच में बदलने की कोशिश शुरू की. सितंबर 2006 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान न्यूयॉर्क में ब्राजील, रूस, भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की पहली अनौपचारिक बैठक हुई. इस बैठक ने चारों देशों के बीच औपचारिक सहयोग की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाई और आगे की बैठकों के लिए आधार तैयार किया.

2008 के संकट ने सहयोग की जरूरत और बढ़ा दी

मई 2008 में रूस के येकातेरिनबर्ग में चारों देशों के विदेश मंत्रियों की पहली औपचारिक स्वतंत्र बैठक हुई. इसके कुछ महीने बाद नवंबर में ब्राजील के साओ पाउलो में वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक हुई. यहां वैश्विक वित्तीय संकट, वित्तीय स्थिरता और आईएमएफ में सुधार जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति बनाने पर जोर दिया गया. इसके बाद आर्थिक सहयोग की दिशा और स्पष्ट होती गई.

2009 में नेताओं की बैठक और 2010 में BRICS का जन्म

16 जून 2009 को रूस के येकातेरिनबर्ग में पहला औपचारिक BRIC शिखर सम्मेलन हुआ. इसमें ब्राजील के लूला डा सिल्वा, रूस के दिमित्री मेदवेदेव, भारत के डॉ. मनमोहन सिंह और चीन के हु जिंताओ शामिल हुए. वैश्विक आर्थिक सुधार और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में बदलाव पर सहमति बनी. इसके बाद दक्षिण अफ्रीका को शामिल करने का फैसला हुआ और 2010 में उसके जुड़ते ही BRIC, BRICS बन गया.