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'बांग्लादेश में हिंदू सुरक्षित, भारतीय मीडिया झूठी,' बांग्लादेश पर बेशर्मी से झूठ बोल रहे खालिदा जिया के नेता

पश्चिम बंगाल के हालात खराब हैं. अल्पसंख्यक सड़कों पर हैं. उनकी मांग बस इतनी है कि उनके मंदिरों को न तोड़ा जाए, उन्हें सुरक्षा मिले और उनके साथ अन्याय न हो. वे बांग्लादेशी हैं, इसलिए बंगाल में बसने का उन्हें हक है. वे एक चुनी गई लोकतांत्रिक सरकार चाहते हैं, जो बिना किसी धार्मिक भेदभाव के सेक्युलर तरीके से शासन चलाए.

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'बांग्लादेश में हिंदू सुरक्षित, भारतीय मीडिया झूठी,' बांग्लादेश पर बेशर्मी से झूठ बोल रहे खालिदा जिया के नेता
Courtesy: Social Media

बांग्लादेश के अल्पसंख्यक ढाका में बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे हैं. बांग्लादेश में 200 से ज्यादा हिंदुओं के मंदिर में उत्पात मचाया गया है, लोगों के घरों में घुसकर बदसलूकी हुई है. अंतरिम सरकार के मुखिया मुहम्मद यूनुस खुद ये मान चुके हैं कि अल्पसंख्यकों के साथ गलत हुआ है. अब मुहम्मद यूनुस, बंगाली हिंदुओं से मुलाकात करने वाले हैं. वे साफ कर चुके हैं जिन लोगों ने मूर्तियों को तोड़ा है, उन्हें बख्शेंगे नहीं. बांग्लादेशी उत्पातियों ने हिंदुओं से जुड़े प्रतीकों को तोड़ा है, एक भारत विरोधी लहर, बांग्लादेश में उठी है. बेशर्मी की हद ये है कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के महासचिव मिर्जा इस्लाम आलमगीर को ये सिर्फ प्रोपेगेंडा लगता है. 

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP), शेख हसीना के जाने के बाद एक बार फिर से कद्दावर पार्टी बन गई है. ऐसा हो सकता है कि यही पार्टी सत्ता में आए. पार्टी के महासचिव मिर्जा इस्लाम आलमगीर ने बेशर्मी से झूठ बोला है. उन्होंने भारत की ओर इशारा करके कहा है कि मीडिया में बांग्लादेश के बारे में दुर्भाग्यपूर्ण प्रचार किया जा रहा है. यह एक तरह की गलतफहमी पैदा की जा रही है.

मिर्जा इस्लाम आलमगीर ने कहा, 'यह फैलाया जा रहा है कि बांग्लादेश में सांप्रदायिक अत्याचार हो रहे हैं, यह सच नहीं है. यह सांप्रदायिक और धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक है. मैं आपको, भारत के मीडिया को ढाका आने और खुद देखने के लिए आमंत्रित करता हूं कि बांग्लादेश में क्या हुआ है.'

'बांग्लादेश के हिंदू सुरक्षित हैं' 

मिर्जा इस्लाम आलमगीर ने कहा है, 'दावा किया जा रहा है बांग्लादेश के लोग सांप्रदायिक दंगे कर रहे हैं. ऐसा नहीं है. अल्पसंख्यक बांग्लादेशी सरकार के हाथों में सुरक्षित हैं. वे हमेशा से सुरक्षित हैं. यह फिर से अंतरिम सरकार और बांग्लादेशियों के खिलाफ एक राजनीतिक साजिश है. लोक शेख हसीना की सरकार नहीं चाहते हैं. इस सरकार ने बड़ी संख्या में लोगों को मारा है, संविधान नष्ट किया है. मानवाधिकार का उल्लंघन किया है. सरकार में भ्रष्टाचार फैला हुआ है.'

कितने दिन तक अस्तित्व में रहेगी अंतरिम सरकार?

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के महासचिव मिर्जा इस्लाम आलमगीर कहते हैं, 'हमारे संविधान में ऐसा प्रावधान है कि अंतरिम सरकार को 90 दिन दिए जाने चाहिए. विशेष परिस्थितियों में, अगर अंतरिम सरकार को लगता है कि जरूरत है तो इस अवधि को बढ़ाया जा सकता है. हमने हमेशा साफ किया है कि हमारा विजन क्या है. हमने कहा है कि हमने इसे 2030 का विजन दिया है. हमने कहा है कि निश्चित रूप से देश में सुधार होंगे.'

'बांग्लादेश में संवैधानिक सुधार करेंगे हम'

उन्होंने कहा, 'हम न्यायिक सुधार, संवैधानिक सुधार और प्रशासनिक सुधार करेंगे. हम भ्रष्टाचार को मिटाने की कोशिश करेंगे. हम लोकतंत्र और लोकतांत्रिक मूल्यों को सही और शुद्ध रूप से बहाल करेंगे. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होगी और लोग किसी भी राजनीतिक पार्टी या राजनीतिक रैलियों में शामिल होने के लिए स्वतंत्र होंगे और उनके लोकतांत्रिक अधिकार स्थापित होंगे.'

'इसलिए जजों को करना पड़ा इस्तीफा....'

मिर्ज़ा इस्लाम आलमगीर ने कहा, 'हम एक उदार लोकतांत्रिक और समृद्ध बांग्लादेश देखना चाहते हैं. हमें विश्वास है कि हम ऐसा करने में सक्षम होंगे. दुर्भाग्य से, पूर्व प्रधान मंत्री की सरकार ने पूरी न्यायपालिका का राजनीतिकरण कर दिया और लोगों ने उनके खिलाफ बहुत गुस्सा दिखाया. लोगों में, वकीलों में, सिविल सोसाइटी में और छात्रों में भी गुस्सा था. इसलिए स्वाभाविक रूप से उन्हें कुछ कड़वे अनुभव हुए. इसलिए मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों को इस्तीफा देना पड़ा.'

दंगाइयों को क्रांतिवीर बता रहे इस्लाम आलमगीर

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के महासचिव, मिर्जा इस्लाम आलमगीर ने कहा, 'पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस्तीफा दे दिया है. अपनी पार्टी और लोगों को छोड़कर देश से भाग गई हैं. उन्हें हमेशा लोगों के साथ रहना चाहिए था, लेकिन उन्होंने देश छोड़ दिया. जहां तक हमारी जानकारी है, वे दिल्ली में हैं. उन्हें भागना पड़ा है. यह छात्र और नागरिक विद्रोह था. यह एक क्रांति थी.'

शेख हसीना पर कैसे-कैसे लग रहे आरोप?

मिर्जा इस्लाम आलमगीर ने कहा, 'शेख हसीना की पुलिस ने क्रांति से पहले 1,000 छात्रों को मार डाला और लगभग 12,000 लोगों को गिरफ्तार किया. लाखों लोग सड़कों पर थे और वे प्रधानमंत्री के आधिकारिक निवास की ओर बढ़ रहे थे. फिर वह अपने हेलीकॉप्टर से देश छोड़कर चली गईं. जब वह देश छोड़कर चली गईं, तो सेना और हम सभी ने राष्ट्रपति से अंतरिम सरकार बनाने का अनुरोध किया. राष्ट्रपति ने ही नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनाई है. अब पूरा देश इस अंतरिम सरकार के साथ है और सभी लोग अंतरिम सरकार को समर्थन दे रहे हैं.'

क्या होगी बांग्लादेशी सरकार की प्राथमिकता?

मिर्जा आलमगीर ने दावा किया, 'अंतरिम सरकार, परिस्थितियों को सामान्य करेगी और कानून-व्यवस्था दुरुस्त करेगी. कुछ दिनों से कोई सरकार नहीं थी, लेकिन अब सरकार होगी. ये सरकार निष्पक्षता से काम करेगी. हम चुनाव के अनुकूल स्थितियां बनाएंगे.'

खालिद जिया होंगी BNP का पीएम फेस 

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के महासचिव, मिर्जा इस्लाम आलमगीर ने कहा, 'खालिदा जिया बीमार हैं. वे पार्टी की अध्यक्ष हैं. वे बेहद बीमार हैं, उन्हें इलाज की जरूरत है. अगर डॉक्टर इजाजत देते हैं तो वे इलाज के लिए विदेश जाएंगी. अगर वे वापस लौटती हैं तो वही बीएनपी की चेहरा होंगी. अगर वह वापस नहीं आ पाती हैं या चुनाव लड़ने के लिए फिट नहीं हैं, तो हमारा चेहरा कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान होंगे.' 

भारत के साथ कैसे होंगे संबंध?

 भारत-बांग्लादेश संबंधों पर, मिर्जा इस्लाम आलमगीर ने कहा है कि यह बेहद मजबूत होगा. एक राजनीतिक पार्टी के तौर पर हम भारत को पड़ोसी और मितर् मानते हैं. भारत को हम कुछ मुद्दों के समाधान के लिए आमंत्रित करते हैं. ये मुद्दे जल बंटवारा, BSF की ओर से सीमाओं पर बांग्लादेशी नागरिकों की हत्या और बेहतर व्यापारिक संबंध है. इन्हें निपटाने की कोशिश की जाएगी.

BNP के दावे में कितना दम?

बांग्लादेश में हिंदू, क्रिश्चियन, बुद्ध और सिख समाज के लोग सड़कों पर हैं. उनकी मांग है कि उनके धार्मिक स्थलों को सुरक्षित रखा जाए, उनके घरों में न घुसा जाए और न ही उनका उत्पीड़न हो. हो इसके ठीक उलट रहा है. साल 1971 में जब भारत और पाकिस्तान के बीच शांति समझौता हुआ था, उस लम्हे से जुड़ी एक स्मारक को तोड़कर रख दिया गया है. जमात और दूसरे संगठनों के सक्रिय होने से हिंदू विरोधी लहर बढ़ी है. लोग दहशत में हैं.