नई दिल्ली: सूडान के संघर्षग्रस्त अबेई क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र के एक बेस पर ड्रोन हमले में छह बांग्लादेशी शांति सैनिकों की मौत हो गई है जबकि आठ अन्य घायल हुए हैं. जिसमें चार की हालत गंभीर बताई जा रही है. यह हमला शनिवार को उस समय हुआ जब बांग्लादेशी शांति सैनिक संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के तहत अपनी ड्यूटी पर तैनात थे. इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है.
विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर मारे गए सैनिकों को देश के बहादुर सपूत बताया और उनके परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की. सरकार ने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की है. बयान में कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र के झंडे के नीचे सेवा कर रहे शांति सैनिकों पर हमला बेहद निंदनीय और अमानवीय है.
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— Defense Technology of Bangladesh-DTB (@DefenseDtb) December 14, 2025
Six Bangladeshi peacekeepers were killed and eight others were injured in an attack on a UN base by terrorists in Abyei, Sudan, on Saturday- ISPR pic.twitter.com/N1lSW22Vu4
विदेश मंत्री ने जानकारी दी कि न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में बांग्लादेश का स्थायी मिशन यूएन अधिकारियों के लगातार संपर्क में है. मिशन ने संयुक्त राष्ट्र से घायलों के लिए सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है. इसके साथ ही अबेई में तैनात बांग्लादेशी दल को हर जरूरी सहायता देने की बात कही गई है.
इससे पहले बांग्लादेश की इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस ने इस घटना को आतंकी हमला बताया था. आईएसपीआर के अनुसार 13 दिसंबर 2025 को हुए इस ड्रोन हमले में बांग्लादेश आर्मी के छह शांति सैनिक शहीद हुए. बयान में यह भी कहा गया कि हमले के समय इलाके में शांति सैनिकों और उग्रवादियों के बीच झड़प जारी थी जिससे हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए.
अबेई क्षेत्र लंबे समय से संघर्ष का केंद्र बना हुआ है. यह इलाका सूडान और दक्षिण सूडान की सीमा पर स्थित है और तेल संसाधनों से समृद्ध माना जाता है. यहां दक्षिण सूडान के डिंका न्गोक समुदाय और सूडान के मिसेरिया खानाबदोश समुदाय के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है.
2005 के शांति समझौते के तहत अबेई के भविष्य को लेकर जनमत संग्रह होना था लेकिन राजनीतिक मतभेदों और सुरक्षा कारणों से यह अब तक नहीं हो सका है. इसी वजह से संयुक्त राष्ट्र ने यहां शांति सेना तैनात की हुई है. इसके बावजूद जमीन, चराई अधिकार, तेल और राजनीतिक नियंत्रण को लेकर विवाद जारी है जिससे यह इलाका बेहद अस्थिर बना हुआ है.