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'सुरक्षित हैं, लेकिन पता नहीं कब तक... डर से हम रोते रहते हैं', बांग्लादेश के हिंदुओं में डर का माहौल

Bangladesh Violence: बांग्लादेश के अल्पसंख्यक हिंदुओं में डर का माहौल है. देश में लगातार अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे टारगेट अटैक की घटनाओं ने उन्हें डरा दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वहां के अल्पसंख्यकों का कहना है कि फिलहाल तो हम सुरक्षित हैं, लेकिन कब तक ये पता नहीं है. डर के कारण हम लोग कभी-कभी रोने भी लगते हैं.

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Bangladesh Violence: अल्पसंख्यकों पर टारगेट हमलों की रिपोर्ट ने बांग्लादेश में हिंदुओं के बीच भय पैदा कर दिया है. गुरुवार को बांग्लादेश के कई अल्पसंख्यकों की आपबीती सामने आई, जिसमें उन्होंने कहा कि हम अभी सुरक्षित महसूस कर रहे हैं, लेकिन इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आखिर ये कब तक चलेगा? हालांकि, नोबेल पुरस्कार विजेता और अंतरिम सरकार के चीफ मुहम्मद यूनुस और छात्र नेताओं ने देश में शांति बहाल करने की अपील की है.

बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी से ग्रेजुएशन करने वाले एक अल्पसंख्यक ने कहा कि मैं कभी राजनीति में शामिल नहीं रहा. हमारे परिवार में कोई भी राजनीति में शामिल नहीं है. लेकिन हमारे देश के संस्थापक बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान के लिए हमारे मन में बहुत प्यार और सम्मान है. आप ऐसा कैसे कर सकते हैं? मेरी आंखें आंसुओं से भरी हैं. सुरक्षा कारणों से मैं अपना नाम नहीं बता सकता हूं.

पीड़ितों का रिश्तेदार बोला- हमने कभी ऐसा सोचा भी नहीं था

एक हिंदू आर्किटेक्ट ने अपने रिश्तेदारों की कहानियों को शेयर करते हुए बताया कि हम सुरक्षित हैं, लेकिन पता नहीं हम कितने समय तक सुरक्षित रहेंगे. हम हमलों के डर से रोते रहते हैं. उन्होंने बताया कि मेरी एक चाची के घर पर हमला हुआ था. उन्होंने ढाका के धानमंडी में बंगबंधु स्मारक म्यूजियम में की गई तोड़फोड़ और बंगबंधु की मूर्तियों के साथ हुए दुर्व्यवहार पर दुख व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि इससे मुझे दुख होता है. मेरा दिल टूट गया है. मैंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसी चीजें होंगी. मेरे दोस्त बांग्लादेश और उसके बड़े पैमाने पर विकास की सराहना करते थे.

पीड़ित अल्पसंख्यक बोला- कड़ी सुरक्षा की जरूरत

अल्पसंख्यक समुदाय के एक अन्य पीड़ित ने बताया कि वो सरकारी कर्मचारी है. मेरा परिवार और रिश्तेदार सुरक्षित हैं, लेकिन वे सदमे में हैं और डर में जी रहे हैं. अंतरिम सरकार से अपेक्षाओं के बारे में, उन्होंने धैर्य रखने का आग्रह किया, लेकिन इस बीच अल्पसंख्यकों के लिए कड़ी सुरक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया.

सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं ने भी अपनी चिंताएं व्यक्त कीं, सुरक्षा और न्याय की मांग की. लोकप्रिय लोक गायक और सांस्कृतिक कार्यकर्ता राहुल आनंद के ढाका में 140 साल पुराने किराए के घर में 5 अगस्त को तोड़फोड़ की गई और आग लगा दी गई. इसके बाद कलाकारों और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं ने घटनाओं के विरोध में एक रैली निकाली.

उधर, ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल बांग्लादेश ने अल्पसंख्यकों के घरों, पूजा स्थलों और व्यवसायों पर हमलों की निंदा की. टीआईबी के कार्यकारी निदेशक इफ़्तेख़ार ज़मान ने कहा कि ये निराशाजनक है कि हमें आंदोलन के अभूतपूर्व विजयी क्षण के बीच धार्मिक अल्पसंख्यकों और राज्य की संपत्तियों की सुरक्षा की मांग करनी पड़ रही है, जहां सैकड़ों लोगों ने समानता, सद्भाव और सभी के समान अधिकारों की मांग के लिए खून बहाया है. ढाका में यूरोपीय संघ के मिशन प्रमुखों ने भी पूजा स्थलों और धार्मिक, जातीय और अन्य अल्पसंख्यकों के सदस्यों पर हमलों के बारे में चिंता व्यक्त की.