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जलते बांग्लादेश के बीच सुप्रीम कोर्ट ने पलटा आरक्षण पर फैसला, 56 के बजाय अब सिर्फ 7 परसेंट ही बचा रिजर्वेशन

बांग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट के हाई कोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें पुराने कोर्ट सिस्टम को बहाल करने की बात कही गई थी. आरक्षण की वजह से पूरा बांग्लादेश जल रहा है. प्रदर्शनकारी सरकारी संपत्तियों को आग के हवाले कर रहे हैं. इन सबके चलते सरकार को पूरे देश में कर्फ्यू लगाना पड़ा है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदर्शनकारी शांत नजर आ रहे हैं. उनकी मांग यही थी कि इस कोटा सिस्टम को खत्म किया जाए.

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Gyanendra Tiwari

Bangladesh: आरक्षण की वजह से जल रहे बांग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोटा सिस्टम के मुद्दे पर चल रहे उग्र विरोध प्रदर्शनों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि लगभग सभी सरकारी नौकरियों को योग्यता के आधार पर दिया जाना चाहिए. अदालत ने नौकरियों में अधिकांश कोटा सिस्टम को रद्द कर दिया है. अभी तक सरकारी नौकरियों में 56 फीसदी सीटें रिजर्व हुआ करती थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया की 93 फीसदी सीटें मेरिट के आधार पर भरी जाएंगी जबकि 7 फीसदी को आरक्षण देकर.

बांग्लादेश में चल हिंसात्मक प्रदर्शन के बीच 100 लोगों की जान चली गई है. छात्र कोटा सिस्टम को रद्द करने की मांग में हिंसात्मक प्रदर्शन कर रहे हैं. सरकार ने 30 परसेंट सीटें 1971 के स्वतंत्रता सेनानियों के पोते पोतियों के लिए रिजर्व किया था.

अब सिर्फ 7 परसेंट सीटें रहेंगी रिजर्व

रविवार को बांग्लादेश की सर्वोच्च अदालत ने हाई कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया. इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 5 परसेंट सीटें स्वतंत्रता सेनानियों के पोते-पोतियों के लिए रिजर्व रहेगी, जबकि 2 फीसदी सीट  जातीय अल्पसंख्यकों, ट्रांसजेंडर और विकलांग लोगों के लिए अलग रखी जाएगी.

सर्वोच्च न्यायालय ने लोअर कोर्ट के कोटा फैसला बहाल करने के फैसले को खारिज कर दिया. अटॉर्नी जनरल एएम अमीद उद्दीन ने न्यूज एजेंसी AFP को बताया, "सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हाई कोर्ट का फैसला अवैध था. स्वतंत्रता सेनानियों के बच्चों के लिए आरक्षित 5 प्रतिशत नौकरियों के अलावा, सरकारी नौकरियों में 2 प्रतिशत सीटें अन्य श्रेणियों के लिए आरक्षित होंगी."

सत्तारूढ़ के पक्ष में था कोटा सिस्टम

स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों को आरक्षण देने को लेकर सत्ता रूढ़ पर आरोप लग रहे थे कि कोटा सत्तारूढ़ अवामी लीग पार्टी के सहयोगियों के पक्ष में है, जिसने पाकिस्तान के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया था. अहिंसात्मक आंदोलन के चलते पूरे देश में शेख हसीना सरकार को कर्फ्यू लगाना पड़ा है.

सरकार की ओर से अभी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कुछ नहीं कहा गया है. राजधानी ढाका की सड़कें पूरी तरह से सुनसान हैं क्योंकि कर्फ्यू का दूसरा दिन भी जारी है. कई इलाकों में छिटपुट झड़पों की घटनाएं सामने आई हैं.

2018 में शेख हसीना ने खत्म किया था कोटा सिस्टम 

प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार ने इस कोटा सिस्टम को साल 2018 में खत्म कर दिया था, लेकिन निचली अदालत ने पिछले महीने 5 जून को इसे फिर से बहाल करने का आदेश दिया था. इस आदेश के बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ और इसने हिंसात्मक रूप ले ली. सरकार ने उग्र प्रदर्शन को देखते हुए पूरे देश में कर्फ्यू लगा दिया.