PM Sheikh Hasina: बांग्लादेश में हाल ही में छात्रों द्वारा कोटा विरोधी प्रदर्शन हुआ था. इस आंदोलन को रोकने के लिए सुरक्षा बल आगे बड़े जिसमें ज्यादा बल लगाने की वजह से कई लोग मारे गए. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस, विरोध प्रदर्शन में कम से कम 150 लोग मारे गए. बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना छात्रों के कोटा विरोधी प्रदर्शन में तबाह हुए मिरपूर मेट्रो स्टेशन का दौरान करने पहुंची थी.
अब इस दौरे को लेकर प्रधानमंत्री शेख हसीना चर्चा में बनी हुई हैं. प्रधानमंत्री शेख हसीना पर दौरे के दौरान टूटे शीशे और बाकी तोड़फोड़ के लिए आंसू बहाने का आरोप लगाया जा रहा है. गुरुवार (25 जुलाई) को मीरपुर में मेट्रो स्टेशन का दौरा करने के दौरान पीएम हसीना रोती और टिशू पेपर से अपने आंसू पोंछती नजर आईं. सोशल मीडिया पर कई यूजर्स प्रधानमंत्री शेख हसीना की आलोचना कर रहे हैं 150 लोग मारे गए छात्रों को लेकर दर्द बयान करने की जगह वह मीरपुर में मेट्रो स्टेशन में तोड़फोड़ होने के लिए आंसू बहा रही हैं.
विरोध प्रदर्शन में यातायात नियंत्रण सुविधा (traffic control facility) और टिकट मशीन तबाह हो गईं. प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बंगलादेशी अखबार को बयान देते हुए कहा, "किस तरह की मानसिकता है उन्हें उन सुविधाओं को नष्ट करने के लिए प्रेरित करती है जो लोगों के जीवन को आसान बनाती हैं? मैं आधुनिक तकनीक से बनी इस परिवहन सुविधा को नष्ट करना स्वीकार नहीं कर सकती." वह आगे कहती हैं कि, "देशवासियों को सरकार द्वारा विकास को नष्ट करने वालों के खिलाफ खड़ा होना चाहिए और अपराधियों का खुद न्याय करना चाहिए."
प्रधानमंत्री शेख हसीना मेट्रो स्टेशन के दौरे के बाद उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर कई यूजर्स तरह-तरह के सवाल उठा रहे हैं. दरअसल, प्रधानमंत्री शेख हसीना मेट्रो स्टेशन का दौरा करने गई थी लेकिन घटना के दौरान जिन छात्रों की गोली मारकर हत्या कर दी गई उनके परिवार से नहीं मिलने गई.
Welcome to my country where a certain authority cries over vandalized Metro instead of crying over the death of thousands of innocent students. "DiGitAL BaNgLaDeSh" for a reason.
— R🇵🇸🇧🇩 (@ssush1trashx) July 25, 2024
सरकारी नौकरियों में आरक्षण के खिलाफ इस महीने की शुरुआत में कॉलेज के छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया था. दरअसल, टॉप पब्लिक जॉब में उन कैंडिडेट को 30 प्रतिशत कोटा दिया था जिनके रिश्तेदार 1971 में पाकिस्तान से बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम के हिस्सा थे. लेकिन 21 जुलाई को, बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने कई कोटा रद्द कर दिया और फैसला सुनाया कि 93 प्रतिशत नौकरियां योग्यता के आधार पर भरी जाएंगी. इस फैसले के बाद से विरोध प्रदर्शन शांत हो गया है लेकिन कुछ छात्र मारे गए लोगों के लिए न्याय और अपने नेताओं की रिहाई की मांग कर रहे हैं, जिसके लिए उन्होंने आंदोलन जारी रखने की कसम खाई है.