नई दिल्ली: भारत ने कुछ दिनों पहले अपने देश के नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में देखते हुए बांग्लादेश में रह रहे राजनयिकों के परिवार को वापस देश आने की सलाह दी थी. जिसपर यूनुस सरकार के विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने इसे भारत का आतंरिक मुद्दा बताया है.
मोहम्मद तौहीद हुसैन ने बुधवार को कहा कि नई दिल्ली के पास अपने राजनयिकों को वापस बुलाने का कोई सटीक कारण नहीं था. उन्होंने दावा किया बांग्लादेश में विदेशी अधिकारियों या उनके परिवार को किसी तरह का कोई खतरा नहीं था. हालांकि बांग्लादेश में लगातार अल्पसंख्यकों के प्रति तनाव बढ़ता ही जा रहा है.
बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले चुनाव से पहले भारत सरकार ने अपने अधिकारियों और उनके परिवारों को एहतियात के तौर पर घर लौटने की सलाह दी थी. जिस पर अब बांग्लादेश ने बयान दिया है. विदेश मंत्रालय में एक मीडिया ब्रीफिंग में बोलते हुए हुसैन ने कहा कि ढाका को भारत से इस फैसले के बारे में बताने या विशिष्ट सुरक्षा चिंताओं को उठाने के संबंध में कोई औपचारिक सूचना नहीं मिली है. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, हुसैन ने कहा कि शायद भारत को कुछ आशंका है या वे कोई संदेश देना चाहते हैं, लेकिन मैं कोई स्पष्ट कारण नहीं बता सकता. वह पहले भारत में बांग्लादेश के उप उच्चायुक्त के रूप में कार्य कर चुके हैं.
भारतीय अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि यह फैसला केवल आश्रितों तक सीमित था और इससे राजनयिक कार्यों पर कोई असर नहीं पड़ा. सूत्रों ने कहा कि बांग्लादेश में मिशन और सभी चौकियां खुली और चालू रहेंगी. हुसैन ने कहा कि बांग्लादेश इस फैसले को भारत का आंतरिक मामला मानता है और अगर राजनयिक अपने परिवारों को वापस भेजने का फैसला करते हैं तो उसे कोई आपत्ति नहीं होगी.
उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से उनका आंतरिक मामला है. वे अपने अधिकारियों या परिवारों को कभी भी जाने के लिए कह सकते हैं. हालांकि सलाह के बावजूद, बांग्लादेश में भारत की राजनयिक उपस्थिति सामान्य रूप से काम कर रही है. ढाका में भारतीय उच्चायोग ने हाल ही में गणतंत्र दिवस का स्वागत समारोह आयोजित किया था.