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India Daily

यूक्रेन-रूस की आड़ में नुकसान का 'डर' छुपा रहा अमेरिका? भारत-यूरोप डील पर ट्रंप सरकार नाराज

भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुई डील की वजह से अमेरिकी अभी भी गुस्से में नजर आ रहा है. एक बार डोनाल्ड ट्रंप सरकार के अधिकारी स्कॉट बेसेंट ने ने इस डील पर नाराजगी जाहिर की है.

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Edited By: Shanu Sharma
यूक्रेन-रूस की आड़ में नुकसान का 'डर' छुपा रहा अमेरिका? भारत-यूरोप डील पर ट्रंप सरकार नाराज
Courtesy: X (@jakharpardeep, @Maga_Trigger, @MacroAlf)

नई दिल्ली:डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर के बीच भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक डील फाइनल हो गया. यूरोप की 27 देश और भारत के बीच फ्री ट्रेड एग्री्मेंट तय हुआ, जिससे अमेरिका को तगड़ा झटका लगा है. इसी बीच अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने इस पर खुलकर नाराजगी जाहिर की है. 

ट्रंप के अधिकारी बेसेंट ने एक इंटरव्यू के दौरान इस डील पर अपनी राय रखते हुए कहा कि उन्हें इससे निराशा हुई है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यूरो के इस रूख ने अमेरिका को चौंका दिया है. इससे पहले खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाराजगी जाहिर की थी.

क्या है भारत-यूरोप एफटीए डील?

यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन 26 जनवरी के दिन गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंची. इसके अगले दिन भारत और यूरोप के बीच शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया. जिसमें फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर सहमति जताई गई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस डील के फाइनल होते ही इसे मदर ऑफ ऑल डील बताया. डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ के बीच यह डील दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार, निवेश और सप्लाई का नया चेन बनाएगा. वहीं भारत और यूरोपी के बीच व्यापार भी बढ़ेंगे और अमेरिका पर निर्भरता कम होगी. हालांकि बेसेंट ने इस डील को रूस के तेल व्यापार से जोड़ा है.

एफटीए डील पर अमेरिका की राय?

बेसेंट ने कहा कि ईयू भारत में रिफाइंड किए गए रूसी पेट्रोलियम उत्पादों को खरीद रहा है. उनका मानना है कि यूरोपीय देश को रूस के खिलाफ साथ देना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. यूरोप ने भारत के साथ एग्रीमेंट कर के अमेरिकी टैरिफ नीति को खत्म करने की कोशिश की. क्योंकि अमेरिका का मानना है कि रूस अपने तेल व्यापार से कमाए गए के राजस्व का इस्तेमाल युद्ध के लिए कर रहा है.

हालांकि जब बेसेंट से पूछा गया कि रूस की वजह से भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाए गए थे, ऐसे में यूरोपी के साथ उनकी ये डील अमेरिका के लिए महंगी साबित हो सकती है. इसपर अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि जिसे जो सही लगे वह कर सकता है कि लेकिन यूरोप का रुख निराशाजनक है. हालांकि यूरोपीय नेता ने इस डील को दोनों के बीच चल रही सालों पुरानी बात का परिणाम बताया है. इस डील से फाइनल होने से भारत को अमेरिका की वजह से हो रहे नुकसानों का असर कम होना संभव है.