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India Daily

बलूचिस्तान का पाकिस्तान को अल्टीमेटम! 1971 की हार याद दिलाकर बोला- सेना हटाओ, एक भी गोली साथ नहीं ले जाने देंगे

बलूच अलगाववादी नेता मीर यार बलोच ने पाकिस्तान को बलूचिस्तान से सेना हटाने का अल्टीमेटम दिया है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से स्वतंत्र बलूचिस्तान को मान्यता देने की मांग की है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
बलूचिस्तान का पाकिस्तान को अल्टीमेटम! 1971 की हार याद दिलाकर बोला- सेना हटाओ, एक भी गोली साथ नहीं ले जाने देंगे
Courtesy: X

बलूच अलगाववादी नेता मीर यार बलोच ने पाकिस्तान के खिलाफ एक बार फिर कड़ा बयान जारी किया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में उन्होंने पाकिस्तान की सेना और सुरक्षा बलों से बलूचिस्तान छोड़ने की मांग की. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने और पाकिस्तानी सैन्य मौजूदगी खत्म कराने के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील भी की.

सेना पर संसाधन लूटने का आरोप

मीर यार बलोच ने पाकिस्तान की सैन्य मौजूदगी को अवैध बताते हुए आरोप लगाया कि सेना बंदूक की ताकत पर बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों और खनिजों का दोहन कर रही है. बयान में पाकिस्तानी सेना को क्षेत्र में रहने वाले लोगों के जीवन, संपत्ति और कारोबार के लिए खतरा बताया गया. उन्होंने पाकिस्तान के सैन्य ढांचे को कथित कब्जे वाली ताकत के तौर पर पेश किया.

सभी सुरक्षा बलों को लौटने की मांग

अलगाववादी नेता ने केवल सेना ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान की वायुसेना, नौसेना, पुलिस और फ्रंटियर कॉर्प्स समेत अन्य सुरक्षा संस्थानों से जुड़े गैर-बलूच पाकिस्तानी कर्मियों के भी क्षेत्र छोड़ने की मांग की. बयान में रक्षा, सीमा सुरक्षा और खनिज संसाधनों की निगरानी में तैनात सभी पाकिस्तानी बलों की वापसी की बात कही गई है.

हथियार भी छोड़ने की शर्त

मीर यार बलोच ने पाकिस्तान से वापसी के दौरान सैन्य हथियार और उपकरण बलूचिस्तान में छोड़ने की मांग की. इनमें लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, टैंक, भारी तोपें, नौसैनिक पोत और अन्य सैन्य साजो-सामान शामिल हैं. उनका तर्क है कि इन संसाधनों की कीमत बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी है, इसलिए इन्हें क्षेत्र से बाहर नहीं ले जाना चाहिए.

1971 की हार का दिया उदाहरण

अपने बयान में बलोच ने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम का हवाला देते हुए पाकिस्तान को उसकी पुरानी सैन्य हार याद दिलाई. उन्होंने दावा किया कि जैसे 1971 में पाकिस्तान ने बांग्लादेश में अपने सैन्य उपकरण पीछे छोड़े थे, वैसे ही बलूचिस्तान से भी उसे हथियारों के बिना लौटना चाहिए. उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान बलूचिस्तान में जमीनी लड़ाई हार चुका है, हालांकि इस दावे के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण नहीं दिया गया.

स्वतंत्र ‘रिपब्लिक’ की मांग

बलूच अलगाववादी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने 11 अगस्त को कथित तौर पर ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ के गठन की घोषणा करते हुए अंतरराष्ट्रीय मान्यता की अपील की थी. क्षेत्र में अलगाववादी संगठनों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है. बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने कई हमलों की जिम्मेदारी ली है, जबकि पाकिस्तान ने सुरक्षा अभियानों और अन्य कड़े उपायों के जरिए जवाब दिया है.