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India Daily

Indo-Nepal Treaty को क्यों रीसेट करना चाहती है पड़ोसी देश की जनता? क्या होगा बालेन सरकार का अगला कदम

नेपाल की जनता ने बालेन्द्र शाह सरकार के सामने भी इंडो-नेपाल ट्रीटी ऑफ पीस एंड फ्रेंडशिप को रीसेट करने की मांग रखी है. क्या है यह ट्रीटी और इससे भारत पर क्या असर पड़ेगा इस बात को आप यहां समझ सकते हैं.

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Edited By: Shanu Sharma
Indo-Nepal Treaty को क्यों रीसेट करना चाहती है पड़ोसी देश की जनता? क्या होगा बालेन सरकार का अगला कदम
Courtesy: X (@ShahBalen)

पड़ोसी देश नेपाल अब युवाओं के हाथों में है. दुनिया को अब इसका नतीजा धीरे-धीरे नजर आना शुरू हो गया है. युवाओं के बीच बढ़ती बेरोजगारी और देश में बढ़ते भ्रष्टाचार के खिलाफ सितंबर 2025 में Gen Z समूह द्वारा प्रदर्शन शुरू किया गया. देखते ही देखते ये प्रदर्शन इतना ज्यादा बढ़ गया कि प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली की सरकार को इस्तीफा देना पड़ा.

नेपाल में के.पी. शर्मा ओली की सरकार गिरने के बाद 27 मार्च 2026 से बालेन्द्र शाह ऊर्फ बालेन शाह ने देश की कमान संभाली. उनके कार्यकाल को पूरा हुए एक महीना हो गया है, हालांकि इसके बाद भी वह अभी मिडिया के सामने खुलकर नहीं आए हैं. हालांकि उन्होंने चुपचाप काम करना शुरू कर दिया है. कई बड़े फैसले ले रहे हैं, ऐसे में नेपाल की विदेश नीति अब कैसे काम करने वाली है, इससे भारत पर भी असर पड़ेगा.

ट्रीटी को एक दशक से रीसेट करने की मांग

नेपाल, भारत के साथ-साथ चीन, बांग्लादेश, भूटान और पाकिस्तान का भी पड़ोसी है, ऐसे में उनके फैसले का असर इन देशों पर भी देखने को मिलेगा. हालांकि चीन शुरू से नेपाल पर अपने पैर जमाने की कोशिश करता रहा है, ऐसे में शाह क्या फैसले लेते हैं यह देखना काफी अहम होगा. नेपाल पर चीन के साथ-साथ दशकों से अमेरिका की भी नजर है. नेपाल पर चीन और अमेरिका के दवाब से भारत को काफी असर पड़ता है. हालांकि इन सभी बातों से पहले यह महत्वपूर्ण मुद्दा है कि नेपाल क्या चाहता है?

क्योंकि नेपाल में लगभग पिछले एक दशक से 1950 में हुए 'इंडो-नेपाल ट्रीटी ऑफ पीस एंड फ्रेंडशिप' समझौते को रीसेट करने की मांग की जा रही है. इसी के तहत भारत और नेपाल के बीच अच्छे संबंध की नींव रखी गई थी. तो सवाल यह उठता है कि अगर इस ट्रीटी को ही बदल दिया जाएगा तो फिर भारत और नेपाल का रिश्ता कैसा रहेगा?

क्या कहता है इंडो-नेपाल ट्रीटी?

सबसे पहले यह बात समझने की जरूरत है कि इंडो-नेपाल ट्रीटी ऑफ पीस एंड फ्रेंडशिप क्या है और इसे बदलने की मांग क्यों की जा रही है? तो हम आपको बता दें कि भारत और नेपाल के बीच 1950 में शांति और मैत्री संधि की गई थी. जिसके तहत दोनों देशों के बीच मैत्री संबंध बनाने का फैसला लिया गया था. जिसके तहत दोनों देशों ने खुली सीमा पर सहमति जताई थी.

इस संधि के तहत दोनों देशों के नागरिकों को दोनों देशों में आवाजाही के लिए किसी तरह की वीजा-पासपोर्ट की जरूरत नहीं पड़ेगी. इसके अलावा दोनों देशों के बीच शांति होगा और नेपाल के नागरिक भारत और भारतीय नेपाल में संपत्ति खरीद सकते हैं. इसके अलावा इस ट्रीटी के तहत नेपाल के लोगों को भारत के सरकारी नौकरी में विशेष छूट देने की बात कही गई थी. साथ ही इसके तहत नेपाल को हथियार आयात की अनुमति लेनी होती है. नेपाल की जनता इसे शुरू से बदलना चाहती है.

ट्रीटी को क्यों रीसेट करना चाहती है नेपाल की जनता  

अब सवाल यह है कि नेपाल इस ट्रीटी से खुश क्यों नहीं है और इसे क्यों बदलना चाहता है. इसके पीछे कई कारण बताया जाता है. सबसे पहला और बड़ा कारण यह दिया जाता है कि इस संधि के तहत नेपाल को अपने देश में किसी दूसरे देश से कोई भी हथियार लाने से पहले भारत से परामर्श करना पड़ता है. ऐसा नहीं करने पड़ 1988 में आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए थे, जिसे आज भी अपमान के रूप में देखा जाता है.

इसके अलावा नेपाल की जनता का मानना है कि जब भारत के साथ  इस संधि पर हस्ताक्षर किए गए तो नेपाल की ओर से तत्कालीन प्रधानमंत्री मोहन शमशेर ने हस्ताक्षर किया था, वहीं भारत की ओर से राजदूत सीपीएन सिंह ने साइन किया था. इसे वह अपनी प्रतिष्ठा के खिलाफ मानते हैं. इसके अलावा उनका यह भी तर्क है कि राणा शासन ने अपनी सरकार को बचाने के लिए भारत के साथ समझौता किया था. इन सभी वजहों के कारण नेपाल के लोग इस संधि को रीसेट करना चाहते हैं. जानकारी के मुताबिक दोनों देशों के बीच रिश्ते को सही रखने के लिए अगले महीने भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री काठमांडू यात्रा पर जाएंगे और अधिकारिक तौर पर वहां जाकर बालेन शाह को दिल्ली आने का न्योता भी देंगे. अब आने वाले समय में पता चलेगा कि नेपाल के बालेन सरकार का विदेश नीति कैसी है और इसका असर भारत पर क्या पड़ेगा.