भारत के खिलाफ आसिम मुनीर की नई साजिश! पाकिस्तान 'बंदूक' नहीं, 'दिमाग' से लड़ रहा जंग, डिसइन्फोलैब रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

पाकिस्तान आर्मी चीफ आसिम मुनीर के नेतृत्व में पाकिस्तान भारत के खिलाफ सूचना युद्ध छेड़ रहा है. डिसइन्फो लैब रिपोर्ट के अनुसार 2025 में ‘रणनीतिक संचार मास्टर प्लान’ शुरू किया गया है. इसमें अंग्रेजी मीडिया प्लेटफॉर्म और थिंक टैंक बनाकर अंतरराष्ट्रीय राय प्रभावित करने की कोशिश हो रही है.

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Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर में मिली हार के बाद पाकिस्तान अब सैन्य मोर्चे पर कमजोर पड़ चुका है. इसलिए उसके आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने नई रणनीति अपनाई है. बंदूक की बजाय अब दिमाग और सूचना का हथियार इस्तेमाल कर भारत की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है. डिसइन्फो लैब की हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान ग्लोबल मीडिया इकोसिस्टम बनाने में जुटा है. इसमें यूरोप, ब्रिटेन और पाकिस्तान से संचालित अंग्रेजी चैनल व थिंक टैंक शामिल हैं, जो कश्मीर जैसे मुद्दों पर पाकिस्तान समर्थक नैरेटिव फैलाने का काम कर रहे हैं.

नैरेटिव वॉर का मास्टर प्लान

डिसइन्फो लैब रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने 2025 में ‘रणनीतिक संचार मास्टर प्लान’ शुरू किया. इसका मुख्य लक्ष्य अंग्रेजी भाषा के ऐसे प्लेटफॉर्म बनाना है जो दुनिया भर में विश्वसनीय दिखें और बारीकी से पाकिस्तान का पक्ष रखें. पहले पाकिस्तान का फोकस उर्दू मीडिया पर था, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असरदार नहीं साबित हुआ. अब ISPR जैसी संस्थाएं ग्लोबल चर्चा को प्रभावित करने के लिए नई चाल चल रही हैं. आसिम मुनीर के नेतृत्व में यह प्लान भारत के खिलाफ नैरेटिव बनाने पर केंद्रित है. पाकिस्तान आर्थिक संकट से जूझ रहा है, लेकिन सूचना युद्ध के लिए संसाधन जुटाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा. विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव पाकिस्तान की पुरानी हार को छिपाने और नई छवि बनाने की कोशिश है.

थिंक टैंक या प्रचार का अड्डा?

इस योजना के तहत पाकिस्तान ने कई नए रिसर्च संस्थान खड़े किए हैं. लाहौर की मिन्हाज यूनिवर्सिटी में हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड पॉलिसी स्टडीज (HIRPS) इसका बड़ा उदाहरण है. यह संस्थान हिमालयी क्षेत्र की भू-राजनीति, सुरक्षा और जलवायु पर शोध का दावा करता है. लेकिन रिपोर्ट बताती है कि इसमें पाकिस्तान के सैन्य और रणनीतिक नेटवर्क से जुड़े लोग सक्रिय हैं. इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रेटेजिक स्टडीज इस्लामाबाद (ISSI) से जुड़े विशेषज्ञ भी यहां काम कर रहे हैं. नाम से यह अकादमिक लगता है, लेकिन असल में भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा तैयार करने का काम हो रहा है. ऐसे थिंक टैंक अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की बात को वैज्ञानिक और निष्पक्ष दिखाने की कोशिश करते हैं.

ग्लोबल मीडिया में पैठ बनाने की कोशिश

पाकिस्तान ने कई अंग्रेजी मीडिया प्लेटफॉर्म को समर्थन दिया या नए शुरू किए हैं. इनमें कराची का AsiaOne News, मैनचेस्टर का DM News English, पेरिस का FP92TV और Afrik1 TV शामिल हैं. ये आउटलेट निष्पक्ष पत्रकारिता का दावा करते हैं, लेकिन आलोचक कहते हैं कि ये पाकिस्तान समर्थक नैरेटिव को बढ़ावा देते हैं. कई पत्रकार पहले TRT World या पाकिस्तानी सेना से जुड़े संगठनों के साथ काम कर चुके हैं. इससे वे सरकारी लाइन को आगे बढ़ाते हुए भी विश्वसनीयता बनाए रखने की कोशिश करते हैं. यूरोप और ब्रिटेन में डिजिटल चैनल चलाकर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक अपनी कहानी पहुंचाना चाहता है.

न्यूट्रल मीडिया के नाम पर नैरेटिव सेट करने की रणनीति

पाकिस्तान की यह पूरी कवायद न्यूट्रल मीडिया के चेहरे के पीछे भारत के खिलाफ नैरेटिव बनाने की है. सोशल मीडिया, थिंक टैंक और अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म के जरिए दिमागी जंग लड़ी जा रही है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान सरकार प्रायोजित मीडिया का सबसे बड़ा संकट भरोसे का है. जब पर्दे के पीछे सेना या सरकार का हाथ दिखता है, तो वैश्विक दर्शक दूर हो जाते हैं. आसिम मुनीर की यह नई चाल पाकिस्तान को सैन्य कमजोरी से उबारने की कोशिश है. लेकिन लंबे समय तक यह रणनीति कितनी सफल होगी, यह देखना बाकी है. भारत को भी सूचना युद्ध में मजबूत कदम उठाने की जरूरत है.