US Israel Iran War

'ईरान से मोहब्बत है तो वहीं जाओ', पाक आर्मी चीफ की धमकी से बौखलाए शिया; क्यों याद करने लगे जिया का दौर?

19 मार्च को रावलपिंडी में आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर और शिया उलेमा की इफ्तार बैठक विवादों में घिर गई. सूत्रों के अनुसार, मुनीर ने कहा, 'अगर आपको ईरान से इतना लगाव है तो वहां चले जाओ.'

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Reepu Kumari

नई दिल्ली: पाकिस्तान में रामजान के दौरान एक इफ्तार बैठक अब पूरे देश में गरमागरम बहस का विषय बन गई है. 19 मार्च को रावलपिंडी में आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने प्रमुख शिया उलेमा से मुलाकात की, लेकिन बातचीत तनावपूर्ण हो गई. सूत्र बताते हैं कि आर्मी चीफ ने करीब एक घंटे तक लगातार अपनी बात रखी और उलेमा को जवाब देने का मौका नहीं दिया.

सबसे विवादास्पद रहा उनका कथित बयान -'ईरान से इतनी मोहब्बत है तो वहीं चले जाओ.' शिया नेताओं ने इसे देशभक्ति पर हमला बताया है. यह घटना ईरान-अमेरिका तनाव के बीच पाकिस्तान की आंतरिक संवेदनशीलताओं को उजागर कर रही है. 

इफ्तार बैठक में तनाव का माहौल

बैठक में मौजूद लोगों ने बताया कि माहौल शुरू से ही असहज था. आर्मी चीफ ने राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशी घटनाओं पर होने वाली हिंसा को बर्दाश्त न करने की बात कही. लेकिन उनका ईरान वाला बयान सबसे ज्यादा विवादित रहा. शिया उलेमा ने इसे अपनी वफादारी पर सवाल उठाने वाला माना. कई मौजूद लोगों का कहना है कि बातचीत एकतरफा रही और उलेमा को अपनी बात रखने का मौका नहीं मिला, जिससे नाराजगी बढ़ी.

शिया उलेमा का गुस्सा और विरोध

मौलाना हसनैन अब्बास गर्देजी ने कहा कि ऐसे शब्द एक उच्च पदाधिकारी के मुंह से नहीं शोभा देते. अल्लामा नजीर अब्बास तकवी ने बताया कि उन्होंने कई बार संवाद की कोशिश की, लेकिन उन्हें दखल नहीं दिया गया. डिनर के बाद दूसरी बैठक का वादा था, लेकिन आर्मी चीफ अचानक चले गए. उलेमा का कहना है कि पाकिस्तान के बनने में शिया समुदाय की बड़ी भूमिका रही है और धार्मिक स्थलों से भावनात्मक जुड़ाव को देशद्रोह से जोड़ना गलत है.

जिया-उल-हक दौर की यादें ताजा

शुक्रवार को सैयद जवाद नकवी ने जुमे की नमाज में आर्मी चीफ के रवैये पर तीखा हमला बोला. उन्होंने इसे जनरल जिया-उल-हक के समय की नीतियों से जोड़ा, जब शिया समुदाय पर दबाव डाला गया था. नकवी का आरोप है कि अब देशभक्ति की परिभाषा को सेना के हिसाब से तय किया जा रहा है. ईरान से धार्मिक लगाव को देश के खिलाफ खड़ा करना गलत नैरेटिव है. उन्होंने कहा कि यह एंटी-शिया एजेंडा है. 

विदेश नीति और आंतरिक दबाव का खेल

उलेमा का एक बड़ा आरोप है कि सेना की कुछ रणनीतिक नीतियों, जैसे विदेशी ताकतों को ठिकाने देने के फैसलों पर सवाल उठाने वालों को दबाया जा रहा है. ईरान युद्ध के बीच पाकिस्तान संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन आंतरिक स्तर पर सांप्रदायिक तनाव बढ़ रहा है. शिया समुदाय ने चेतावनी दी है कि ऐसी भाषा से समाज में दरार पड़ सकती है. 

पाकिस्तान में बढ़ता सांप्रदायिक विवाद

यह विवाद पाकिस्तान की धार्मिक और राजनीतिक स्थिति को और जटिल बना रहा है. शिया नेताओं ने अपील की है कि देशभक्ति और धार्मिक भावनाओं को अलग-अलग रखा जाए. आर्मी चीफ की बैठक का मकसद एकता और सद्भाव था, लेकिन बयानों से उलटा असर हुआ है. आने वाले दिनों में यह बहस और तेज हो सकती है, खासकर जब क्षेत्रीय तनाव चरम पर है. सभी पक्षों को संयम बरतने की जरूरत है.