Armenia Coup Plot Foiled: भारत के भरोसेमंद दोस्त आर्मेनिया में इन दिनों सियासी भूचाल आया हुआ है. यहां एक बड़ा तख्तापलट करने की साजिश को नाकाम कर दिया गया है. इस साजिश में चर्च के एक बड़े धर्मगुरु, सांसद और कुल 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. आरोप है कि ये लोग सरकार को हटाकर सत्ता अपने हाथ में लेने की तैयारी कर रहे थे. गिरफ्तारी के बाद से चर्च और प्रधानमंत्री निकोल पाशिनियान के बीच तनाव और बढ़ गया है. मामला इतना बड़ा है कि चर्च और सरकार आमने-सामने आ गए हैं.
इस विवाद के असर न सिर्फ आर्मेनिया तक सीमित हैं, बल्कि भारत से इसके रिश्तों पर भी नजरें टिकी हैं क्योंकि दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग काफी गहरा है.
आर्मेनिया की सबसे ताकतवर संस्था मानी जाने वाली अपोस्टोलिक चर्च और प्रधानमंत्री पाशिनियान के बीच टकराव कोई नया नहीं है. कराबाख युद्ध में हार के बाद से ही चर्च प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा था. अब जब पाशिनियान ने अजरबैजान के साथ शांति समझौते पर काम शुरू किया, तो चर्च ने इसे देश की आत्मा से समझौता बताया.
गिरफ्तार धर्मगुरु गैल्स्टैनियन ने पिछले साल बड़े प्रदर्शन किए और सरकार को कटघरे में खड़ा किया. अब उन पर सत्ता हथियाने की साजिश का आरोप लगा है.
जांच एजेंसियों का दावा है कि जनवरी 2025 से ही करीब 1000 लोग एक संगठित साजिश में लगे थे. इनका प्लान था, बम धमाके, सरकारी वेबसाइटों पर साइबर हमला, और देशभर में दंगे भड़काना. इसके लिए 200 लड़ाकों की टीम तैयार की गई थी. हथियार और गोला-बारूद की बरामदगी भी हुई है. ये साजिश सफल हो जाती तो देश में खूनखराबा और अफरा-तफरी फैल जाती.
भारत और आर्मेनिया के रिश्ते बीते कुछ सालों में काफी मजबूत हुए हैं. भारत ने उसे हथियार बेचे हैं और रणनीतिक साझेदारी भी की है. ऐसे में वहां का राजनीतिक अस्थिर होना भारत की चिंता बढ़ा सकता है. अगर आर्मेनिया में सरकार बदलती है या धार्मिक सत्ता मजबूत होती है, तो भारत की रणनीति पर असर पड़ सकता है.