नई दिल्ली: ईरान में सत्ता विरोधी लहर धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ता जा रहा है. ईरान की जनता सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है. यह प्रदर्शन पिछेल कुछ दिनों से जारी है. साल के पहले दिन भी प्रदर्शनकारी अपनी मांगो को लेकर सड़क पर उतरे हैं. प्रदर्शनकारी सबसे पहले सत्ता में बदलाव चाहते हैं. जिसके लिए शहर-शहर रैलियां निकाली जा रही है.
सड़क पर प्रदर्शन कर रहे देहलोरन, बाघमलेक, इस्फ़हान समेत कई लोगों ने सुप्रीम लीडर खामेनेई को हटा कर निर्वासित राजकुमार रजा पहलवी को सत्ता में लाने की बात कही है. यह प्रदर्शन देखते ही देखते ईरान के 20 से भी ज्यादा प्रांतों तक पहुंच चुका है.
ईरान में महंगाई अपने चरम पर है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि देश के लिए यह आर्थिक संकट सुप्रीम लीडर खामेनेई की वजह से आया है. रियाल अब डॉलर के मुकाबले काफी नीचे जा चुका है. ऐसे में लोगों की मांग है कि महंगाई कम हो. इससे पहले 2022 महसा अमीनी आंदोलन इतने बड़े स्तर आयोजित किया गया था. जिसके बाद अभी प्रदर्शन धीरे-धीरे बढ़ता ही जा रहा है. इसके समर्थन में कई दुकानदारों ने दुकान बंद की है. उनका कहना है कि महंगाई दर अभी 42 फीसदी को भी पार कर चुका है. रोजमर्रा की जरूरतें भी पूरी नहीं पा रही है. प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर उतर कर 'डरो नहीं, हम सब साथ हैं', 'तानाशाह मुर्दाबाद' और 'डेथ टू डिक्टेटर' जैसे नारे लगा रहे हैं. इतना ही नहीं कुछ लोग ईरान के पूर्व शासक रजा शाह के समर्थन में भी उतरे हैं.
प्रदर्शन खत्म करने के लिए कई जगहों पर बल का भी प्रयोग किया जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कुछ शहरों में गोलीबारी और आंसू गोले भी छोड़े गए हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों के जोश को कोई कमी नजर नहीं आ रही है. सभी प्रदर्शनकारी अपने जगह पर डटे हुए हैं. मिल रही जानकारी के मुताबिक स्टूडेंट लीडर सरीरा करीमी को हिरासत में लिया गया है. वहीं मौलानाओं द्वारा भी प्रदर्शनकारियों को पूरा समर्थन मिल रहा है. वहीं कुछ लोग इसे गलत बता रहे हैं. उनका कहना है कि इससे देश के अन्य लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि अब यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में यह प्रदर्शन और बढ़ता है या लोगों का गुस्सा थम जाएगा.