होर्मुज में बढ़ते तनाव के बीच रियाद पहुंचे रियाद पहुंचे अजित डोभाल, ऊर्जा संकट से निपटने के लिए की जा रही नई प्लानिंग!
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बढ़ते तनाव के बीच भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल रविवार को सऊदी अरब की राजधानी रियाद पहुंचे हैं. उनकी यह यात्रा भारत की सक्रिय कूटनीति का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है.
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव थमता नजर नहीं आ रहा है. दोनों देशों के बीच चल रहा सीजफायर जल्द ही खत्म होने वाला है. दोनों देशों के बीच शांति वार्ता फेल हो चुकी है. जिसके कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर खतरा बढ़ गया है. यहां तक की भारतीय जहाज पर भी हमले किए गए. इस संकट के बीच भारत ने भी अपनी कूटनीतिक गतिविधियां तेज कर दी है.
भारत के लिए बढ़ते ऊर्जा संकट के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल रविवार को सऊदी अरब की राजधानी रियाद पहुंचे हैं. डोभाल का यह दौरा मिडिल ईस्ट के बदलते समीकरणों के बीच भारत की सक्रिय कूटनीति का स्पष्ट संकेत है. रियाद में उन्होंने सऊदी अरब के शीर्ष नेतृत्व के साथ अहम बैठकें कीं.
सऊदी में ऊर्जा मंत्री के साथ बैठक
डोभाल ने सऊदी में ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान, विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मुसैद अल-ऐबान के साथ बैठक की. यह बैठकें ऊर्जा सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और द्विपक्षीय सहयोग पर केंद्रित रहीं. भारतीय दूतावास ने इस यात्रा को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बताया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एनर्जी सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है. यहां किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है. भारत अब कच्चे तेल के वैकल्पिक स्रोतों पर काम कर रहा है. सरकार का प्रयास है कि होर्मुज मार्ग पर निर्भरता को कम किया जाए और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए. डोभाल की यात्रा इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है.
क्या है भारत की तैयारी?
डोभाल की मुलाकातों में ऊर्जा सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा रहा. भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से पूरा करता है. सऊदी अरब भारत का प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता देश है. बैठक में दोनों पक्षों ने ऊर्जा सहयोग को और मजबूत बनाने पर चर्चा की. साथ ही समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के उपायों पर भी विस्तार से बात हुई. भारत इस संकट को बहुत गंभीरता से ले रहा है. सरकार का मानना है कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखना न केवल क्षेत्रीय देशों के हित में है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत की आर्थिक प्रगति के लिए भी आवश्यक है. भारत की कूटनीति साफ संदेश दे रही है कि वह क्षेत्रीय सुरक्षा और अपनी ऊर्जा जरूरतों की रक्षा के लिए सक्रिय रूप से प्रयासरत है.