रूस के बाद सीरिया को मिला नए मुस्लिम दोस्त का साथ, इस्लामिक राष्ट्र से लड़ने के लिए निकली खूंखार शिया आर्मी
Syria Civil War: सीरिया का गृह युद्ध एक बार फिर सुर्खियों में है, क्योंकि नवगठित विद्रोही गठबंधन ने एक आश्चर्यजनक हमला कर देश के दूसरे सबसे बड़े शहर अलेप्पो पर कब्जा कर लिया है.
Syria Civil War: सीरिया में चल रहे गतिरोध को दबाने के लिए पहले रूस ने साथ दिया. अब ईरान भी अपने दोस्त की मदद के लिए सैनिकों को भेज रहा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान-समर्थित इराकी हशद अल-शाबी लड़ाकों ने अल-बुकरामल सैन्य मार्ग से सीरिया में प्रवेश किया. इन मिलिशिया समूहों में इराक के कातिब हिजबुल्लाह और फतेमियून जैसे समूह शामिल हैं.
सीरिया में ईरान और रूस का गठजोड़
सीरिया में लंबे समय से रूस और ईरान का सहयोग जारी है. राष्ट्रपति बशर अल-असद की सरकार को इन दोनों देशों का सैन्य समर्थन मिलता रहा है. हाल के दिनों में इस्लामवादी गुटों और तुर्की-समर्थित विद्रोहियों ने बड़े इलाके पर कब्जा कर लिया है, जिससे तनाव और बढ़ गया है. असद ने इसे अमेरिका और पश्चिमी देशों द्वारा क्षेत्र का नक्शा बदलने की साजिश बताया है.
अमेरिकी और यूरोपीय देशों को टेंशन
ईरानी सेनाओं की सीरिया में उपस्थिति से अमेरिका और यूरोपीय देशों में चिंता बढ़ गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान और रूस की संयुक्त रणनीति से पश्चिमी देशों की योजना प्रभावित हो सकती है. इस्लामवादी गुटों के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए ईरान और रूस का सैन्य हस्तक्षेप अमेरिका और यूरोप के लिए चुनौती बन सकता है.
अलेप्पो: संघर्ष का केंद्र
सीरिया के ऐतिहासिक शहर अलेप्पो पर इस्लामवादी गुट हयात तहरीर अल-शाम (HTS) और उनके सहयोगी समूहों ने कब्जा कर लिया है. इस शहर पर नियंत्रण हासिल करने के लिए असद सरकार के बलों और विद्रोही गुटों के बीच भीषण संघर्ष हो रहा है. अलेप्पो का यह संघर्ष क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को और जटिल बना रहा है.
चीन का सीरिया को समर्थन
इस घटनाक्रम के बीच, चीन ने भी सीरिया को अपना समर्थन दिया है. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि चीन सीरिया की राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों का समर्थन करता है. चीन ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए सकारात्मक कदम उठाने की भी बात कही.
सीरिया के संकट ने एक बार फिर मध्य पूर्व में स्थिरता के सवाल को केंद्र में ला दिया है. ईरान और रूस के बढ़ते हस्तक्षेप से अमेरिका और यूरोपीय देशों के लिए नए सुरक्षा मुद्दे खड़े हो गए हैं. यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले समय में यह संघर्ष किस दिशा में जाता है और क्षेत्रीय राजनीति पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है.