menu-icon
India Daily

तालिबान की एक और घिनौनी करतूत, महिलाओं की लिखी गईं 140 किताबों पर लगाया बैन

बता दें कि अफगानिस्तान में लड़कियों को छठी कक्षा से आगे पढ़ने की अनुमति नहीं है. तालिबानी सरकार में महिलाओं से उनके अधिकार छीने जा रहे हैं. तालिबान ने उन विषयों और किताबों को निशाना बनाया है, जो उनकी विचारधारा के खिलाफ माने जाते हैं.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
तालिबान की एक और घिनौनी करतूत, महिलाओं की लिखी गईं 140 किताबों पर लगाया बैन
Courtesy: Grok

Afghanistan News: तालिबान ने अफगानिस्तान में महिलाओं द्वारा लिखी गई 140 किताबों और 18 विषयों पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिसमें मानवाधिकार, लैंगिक अध्ययन और महिलाओं की समाजशास्त्र जैसे विषय शामिल हैं. यह आदेश अगस्त 2025 में जारी हुआ, जिसका मकसद तालिबान नीतियों और शरिया कानून के खिलाफ माने जाने वाले विषयों को हटाना है. इसके अलावा, ईरानी लेखकों की 310 किताबों पर भी रोक लगाई गई है. यह कदम महिलाओं की शिक्षा और बौद्धिक स्वतंत्रता पर गहरा आघात है.

अफगानिस्तान में तालिबान ने एक बार फिर महिलाओं की शिक्षा पर कड़ा प्रहार किया है. अगस्त 2025 में जारी एक आदेश में, तालिबान ने महिलाओं द्वारा लिखी गई 140 किताबों और 18 विषयों पर प्रतिबंध लगा दिया, जिनमें मानवाधिकार, लैंगिक अध्ययन और महिलाओं की समाजशास्त्र जैसे विषय शामिल हैं. यह कदम तालिबान की उस नीति का हिस्सा है, जो महिलाओं को शिक्षा और सामाजिक जीवन से धीरे-धीरे हटाने का प्रयास करती है. ईरानी लेखकों की किताबों पर भी रोक लगाकर तालिबान ने वैश्विक बौद्धिक समुदाय से अफगानिस्तान को और अलग-थलग करने की कोशिश की है. यह खबर अफगान महिलाओं के भविष्य पर गहरा सवाल उठाती है.

महिलाओं की शिक्षा पर बढ़ता संकट

तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद से पिछले चार सालों में महिलाओं की शिक्षा पर कई पाबंदियां लगाई गई हैं. छठी कक्षा से आगे लड़कियों को पढ़ाई की अनुमति नहीं है. 2024 में मिडवाइफरी पाठ्यक्रम, जो महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण थे, बंद कर दिए गए. हाल ही में आए भूकंप में भी तालिबान के सख्त नियमों का दुखद परिणाम देखने को मिला, जब मलबे में फंसी महिलाओं को गैर-महिलाओं द्वारा छूने की मनाही के कारण समय पर मदद नहीं मिली. यह स्थिति 43 मिलियन की आबादी वाले देश में, जहां लगभग आधी आबादी महिलाएं हैं, बेहद चिंताजनक है.

प्रतिबंधित किताबें और विषय

तालिबान ने उन विषयों और किताबों को निशाना बनाया है, जो उनकी विचारधारा के खिलाफ माने जाते हैं. मानवाधिकार, यौन उत्पीड़न, और महिलाओं की संचार में भूमिका जैसे विषय अब पाठ्यक्रम से हटा दिए गए हैं. यहां तक कि 'सेफ्टी इन द केमिकल लेबोरेटरी' जैसी वैज्ञानिक किताबों को भी 'तालिबान विरोधी' बताकर प्रतिबंधित कर दिया गया है. इसके साथ ही, ईरानी लेखकों की 310 किताबों पर रोक लगाकर तालिबान ने 'ईरानी प्रभाव' को रोकने की बात कही है. यह कदम अफगान शिक्षा को वैश्विक स्तर से और अलग कर रहा है.

तालिबान का बचाव, आलोचकों की चेतावनी

तालिबान का दावा है कि वह इस्लामी कानून के दायरे में महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करता है. लेकिन शिक्षाविदों और लेखकों का कहना है कि यह नीति महिलाओं को पूरी तरह से पाठ्यक्रम से मिटाने की कोशिश है. पूर्व न्याय उपमंत्री ज़किया अदेली, जिनकी किताब भी प्रतिबंधित है, ने कहा कि यह निर्णय तालिबान की पुरानी नीतियों का ही हिस्सा है. उनका कहना है कि तालिबान शुरू से ही महिलाओं को शिक्षा से वंचित करने पर तुला है.

शिक्षकों की चुनौती

काबुल विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर ने बीबीसी को बताया कि शिक्षकों को अब खुद पाठ्यपुस्तकों के अध्याय तैयार करने पड़ रहे हैं, लेकिन तालिबान की पाबंदियों के कारण अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करना लगभग असंभव है. ईरानी किताबों पर रोक ने भी अफगानिस्तान को वैश्विक अकादमिक समुदाय से और अलग कर दिया है. शिक्षक और छात्र दोनों इस संकट से जूझ रहे हैं, जहां भविष्य की राह अनिश्चित दिख रही है.