नई दिल्ली: खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ड्रोन हमलों का खतरा कई देशों के लिए चिंता का विषय बन गया है. इसी कारण 11 देशों ने यूक्रेन से शाहेद प्रकार के ड्रोन से बचाव के लिए तकनीकी और सुरक्षा सहयोग मांगा है.
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि कीव इन अनुरोधों की समीक्षा कर रहा है. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि यूक्रेन केवल उन्हीं देशों की मदद करेगा जो उसके साथ खड़े हैं और उसकी सुरक्षा में सहयोग कर रहे हैं.
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने बताया कि कई देशों ने यूक्रेन से ड्रोन हमलों से बचाव के लिए मदद मांगी है. उनके अनुसार, शाहेद प्रकार के ड्रोन और इसी तरह की चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग के अनुरोध मिले हैं. यूक्रेन ने इन सभी अनुरोधों की विस्तार से समीक्षा की है. हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि किन देशों को मदद दी जाएगी और किन देशों को मदद नहीं दी जाएगी.
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने सोशल मीडिया पर कहा कि इजरायल को ड्रोन सहयोग देकर यूक्रेन ने खुद को इस युद्ध में शामिल कर लिया है. उन्होंने दावा किया कि अब पूरा यूक्रेन ईरान के लिए संभावित लक्ष्य बन सकता है.
जेलेंस्की पहले ही यह जानकारी दे चुके हैं कि यूक्रेन ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा में मदद के लिए इंटरसेप्टर ड्रोन और विशेषज्ञों की एक टीम भेजी है. इस कदम को क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग के रूप में देखा जा रहा है. यूक्रेन का कहना है कि उसका अनुभव अन्य देशों के लिए भी उपयोगी हो सकता है.
रूस के साथ युद्ध के दौरान यूक्रेन ने ड्रोन से बचाव के लिए मजबूत और बहुस्तरीय रक्षा प्रणाली विकसित की है. इसमें मोबाइल फायरिंग यूनिट, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर तकनीक और स्वदेशी इंटरसेप्टर ड्रोन शामिल हैं. कई बार भारी मशीनगनों से लैस पिकअप वाहनों का भी उपयोग किया जाता है.
यूक्रेन के सेना प्रमुख ओलेकसांद्र सिरस्की के अनुसार, फरवरी में राजधानी कीव और आसपास के क्षेत्रों पर हमला करने वाले 70 प्रतिशत से ज्यादा शाहेद ड्रोन इंटरसेप्टर सिस्टम से मार गिराए गए. विशेषज्ञों का मानना है कि यही अनुभव अब दूसरे देशों को भी आकर्षित कर रहा है.