'अमेरिका भारत को दूसरा चीन नहीं बनने देगा': रूसी राजदूत का बड़ा दावा, बताया अमेरिका का छिपा हुआ डर
रूसी राजदूत डेनिस अलिपोव ने दावा किया कि एक अमेरिकी अधिकारी के बयानों से जाहिर हुआ है कि वाशिंगटन भारत को प्रतिद्वंद्वी चीन जैसा बनने से रोकने की कोशिश करेगा.
भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलिपोव ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि एक शीर्ष अमेरिकी अधिकारी ने अनजाने में यह स्वीकार किया है कि वाशिंगटन भारत को दूसरा चीन या अपना प्रतिद्वंद्वी नहीं बनने देगा. अलिपोव ने इसे 'फ्रायडियन स्लिप' (अचेतन मन का सच बाहर आना) करार दिया. उनके अनुसार, यह बयान इसी साल नई दिल्ली में आयोजित 'रायसीना डायलॉग' के दौरान दिया गया था, जो भारत के बढ़ते कद को लेकर अमेरिका की चिंताओं को दर्शाता है.
भारत को नियंत्रित करने की अमेरिकी रणनीति
एनडीटीवी डिफेंस समिट में बोलते हुए रूसी राजदूत ने कहा कि जैसे-जैसे भारत आर्थिक और सामरिक रूप से मजबूत होकर महाशक्ति बनेगा, अमेरिका उसे नियंत्रित (Contain) करने की हर संभव कोशिश करेगा. उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस द्वारा पारित 'ग्रेम एक्ट' (Graham Act) का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे कानून भारत की आर्थिक प्रगति और बढ़ती शक्ति पर अंकुश लगाने की रणनीति का ही एक हिस्सा हैं.
तेल खरीद और अमेरिकी दबाव पर रूस का पक्ष
अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा 'लिंडसे ओ ग्रेम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट 2026' पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद भारत पर रूसी तेल खरीदने को लेकर दबाव बढ़ गया है. इस कानून के तहत रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है. इस पर अलिपोव ने कहा कि भारत रूस के भले के लिए नहीं, बल्कि अपनी अर्थव्यवस्था और 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा के लिए प्रतिस्पर्धी दरों पर तेल खरीद रहा है. उन्होंने भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' की तारीफ की.
Also Read
भारत सरकार का कड़ा रुख
अमेरिकी प्रतिबंध कानून पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा और 140 करोड़ लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है. भारत सरकार ने कहा है कि वह अपने व्यापारिक और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी तथा भारतीय उद्योग निकायों के साथ मिलकर काम करेगी.