असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने आज विधानसभा में कुछ ऐसा कहा है जिसको लेकर हंगामा मच गया है. विधानसभा में चर्चा के दौरान विपक्ष ने आरोप लगाए कि मुख्यमंत्री एक ही पक्ष की ओर से बोल रहे हैं तो हिमंत बिस्व सरमा भड़क गए. उन्होंने कहा कि हां मैं साइड ले रहा हूं और मैं असम को मियां मुसलमानों की भूमि नहीं बनने दूंगा. अब खुद हिमंत बिस्व सरमा ने ही इसका वीडियो भी शेयर किया है. उन्होंने लिखा है कि कांग्रेसियों को जितना चिल्लाना और चीखना है, वे कर लें लेकिन असम को 'मियां भूमि' नहीं बनने दूंगा.
विधानसभा में हिमंत बिस्व सरमा, 'अल्पसंख्यक वोटरों के लिए कंपटीशन करने की कोई जरूरत नहीं है.' इसी पर विपक्षियों ने हंगामा करना शुरू कर दिया तो हिमंत भड़क गए. उन्होंने कहा, 'आपको इससे क्या करना है? मैं पक्ष लूंगा, आप क्या कर लोगे? जो करना है करो. डिवाइड एंड रूल? ठीक है, वो भी ठीक है. मैं असम को मियां मुसलमानों की जमीन नहीं बनने दूंगा.' बता दें कि असम में मियां मुस्लिम उन मुसलमानों को कहा जाता है जो बांग्ला बोलते हैं. अक्सर इन पर अवैध प्रवासी होने के आरोप भी लगते हैं.
कांग्रेसियों को जितना चिल्लाना और चीखना है, वे कर लें; मैं असम को 'मिया भूमि' नहीं बनने दूंगा। pic.twitter.com/33buJ6QbAO
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) August 27, 2024Also Read
दरअसल, इससे पहले निर्दलीय विधायक अखिल गोगोई ने आरोप लगाए थे कि बीजेपी 2002 के गुजरात दंगों जैसी स्थिति असम में पैदा करना चाहती है. उन्होंने लिखा था कि कुछ संगठनों को धमकी दी जा रही है कि वे ऊपरी असम के इलाकों को छोड़कर चले जाएं. अखिल गोगोई ने अपने X हैंडल पर लिखा, 'चुनाव जीतने के लिए बीजेपी असम की अस्थिरता और टकराव की स्थिति का फायदा उठाना चाहती है. हम सब जानते हैं कि कौन लोग बीजेपी के एजेंडा को असम में लागू करवा रहे हैं.'
इसी मामले को लेकर AIUDF ने भी असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य को चिट्ठी लिखी है और उन अज्ञात संघठनों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कीहै जो मुस्लिमों को धमकी दे रहे हैं और उन्हें ऊपरी असम के इलाकों को छोड़ देने के लिए कह रहे हैं. बता दें कि हिमंत बिस्व सरमा पहले भी मियां मुस्लिमों के खिलाफ बयान देते रहे हैं. एक बार उन्होंने कहा था कि अगले 10 साल के लिए बीजेपी को मियां मुस्लिमों का वोट नहीं चाहिए.