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India Daily

जहां कभी गूंजे थे युद्ध के कदम, वहीं PM मोदी ने किया योग... जानिए रेड रोड की अनकही कहानी

कोलकाता की रेड रोड जिसे आज इंदिरा गांधी सरणी के नाम से जाना जाता है, दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अस्थायी एयरस्ट्रिप के रूप में इस्तेमाल की गई थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी ऐतिहासिक सड़क पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लिया.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
जहां कभी गूंजे थे युद्ध के कदम, वहीं PM मोदी ने किया योग... जानिए रेड रोड की अनकही कहानी
Courtesy: @narendramodi X Account

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर कोलकाता की ऐतिहासिक रेड रोड पर हजारों लोगों के साथ योग किया. लेकिन जिस सड़क पर आज योग का आयोजन हुआ, उसका इतिहास केवल सांस्कृतिक और प्रशासनिक महत्व तक सीमित नहीं है. यह सड़क दूसरे विश्व युद्ध के दौरान एक अस्थायी हवाई पट्टी के रूप में भी इस्तेमाल की जा चुकी है.

कोलकाता की प्रसिद्ध रेड रोड, जिसका आधिकारिक नाम इंदिरा गांधी सरणी है, शहर के विशाल मैदान क्षेत्र के बीच से गुजरती है. यह सड़क ईडन गार्डन्स को फोर्ट विलियम के पश्चिमी द्वार से जोड़ती है. वर्षों से यह कोलकाता की सबसे महत्वपूर्ण औपचारिक और सार्वजनिक गतिविधियों का केंद्र रही है.

कब हुआ इस सड़क का निर्माण?

इतिहासकारों के अनुसार इस सड़क का निर्माण लगभग 1820 के आसपास किया गया था. उस समय इसे "सेक्रेटरीज वॉक" कहा जाता था. इसका उद्देश्य तत्कालीन गवर्नर जनरल के आवास, जो आज राजभवन कोलकाता के नाम से जाना जाता है, को शहर के दक्षिणी हिस्सों से जोड़ना था. यह मार्ग ब्रिटिश अधिकारियों को भीड़भाड़ वाले व्यापारिक इलाकों से बचाते हुए तेज आवाजाही की सुविधा देता था.

रेड रोड के पीछे की क्या है कहानी?

रेड रोड नाम के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है. माना जाता है कि सड़क के निर्माण के दौरान इसकी सतह पर लाल ईंटों के टुकड़ों की परत बिछाई गई थी. इसी कारण स्थानीय लोगों ने इसे रेड रोड कहना शुरू कर दिया. कुछ ऐतिहासिक दस्तावेजों में इसे लेडीज माइल के नाम से भी दर्ज किया गया है क्योंकि यूरोपीय महिलाएं यहां सुबह और शाम टहलने आती थीं.

क्या है इस सड़क का महत्व?

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इस सड़क का महत्व और बढ़ गया. 1941 से 1945 के बीच जापानी हवाई हमलों के खतरे को देखते हुए ब्रिटिश प्रशासन ने रेड रोड को एक अस्थायी एयरस्ट्रिप में बदल दिया था. मित्र देशों के लड़ाकू विमान यहां से उड़ान भरते और उतरते थे. युद्धकालीन जरूरतों को पूरा करने के लिए ट्राम लाइनों का मार्ग भी बदला गया था. हालांकि सीमित चौड़ाई, धुंध और आसपास की संरचनाओं के कारण यहां विमान संचालन आसान नहीं था, फिर भी इस सड़क ने कोलकाता की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

रेड रोड केवल युद्ध का गवाह ही नहीं रही, बल्कि कई ऐतिहासिक आयोजनों की भी साक्षी बनी है. वर्ष 1911 में ब्रिटिश सम्राट किंग जॉर्ज पंचम और क्वीन मैरी के कोलकाता आगमन पर यहां भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया गया था. आज भी हर वर्ष गणतंत्र दिवस पर पश्चिम बंगाल की प्रमुख परेड इसी सड़क पर आयोजित होती है.

अक्टूबर 1985 में इस सड़क का नाम बदलकर इंदिरा गांधी सरणी कर दिया गया, लेकिन कोलकाता के अधिकांश लोग आज भी इसे रेड रोड के नाम से ही जानते हैं. युद्ध, इतिहास और आधुनिक आयोजनों की गवाह यह सड़क आज भी शहर की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है.