मुंबई: महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों से पहले सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के अंदर खींचतान बढ़ती जा रही है. भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के बीच नेताओं की खरीद-फरोख्त व टिकट वितरण को लेकर तल्खी बढ़ी ही थी कि शिवसेना कोटे से मंत्री दादा भुसे ने खुलकर एकनाथ शिंदे का पक्ष लेते हुए सनसनीखेज बयान दे दिया.
बुधवार को नंदुरबार में नगर परिषद चुनाव की रैली में स्कूली शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने कहा, “आज भी अगर आप आम जनता से पूछेंगे कि उनके दिल में कौन सा मुख्यमंत्री बसता है, तो एक ही नाम आएगा एकनाथ शिंदे! चिंता न करें, जो किस्मत में लिखा है, वो जरूर होगा. हम सब फिर से एकनाथ शिंदे को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनते हुए देखेंगे.”
भुसे यहीं नहीं रुके उन्होंने शिंदे की कार्यशैली की तारीफ करते हुए कहा, “महाराष्ट्र ने आज तक एकनाथ शिंदे जैसा दुर्लभ मुख्यमंत्री नहीं देखा. रात 2-3 बजे तक लोग उनसे मिलते थे, दिन में 20-22 घंटे काम करते थे. फाइलें लटकती नहीं थीं, तुरंत फैसले होते थे. खुद उपमुख्यमंत्री अजित पवार भी मान चुके हैं कि इतनी बड़ी संख्या में महत्वपूर्ण मंजूरियां देने वाला मुख्यमंत्री राज्य ने पहले कभी नहीं देखा.”
यह बयान ऐसे समय में आया है जब महायुति के तीनों प्रमुख घटक भाजपा, शिंदे सेना और अजित पवार की एनसीपी स्थानीय निकाय चुनावों में एक-दूसरे के बागी नेताओं को टिकट दे रहे हैं. कई जगहों पर शिवसेना और भाजपा आमने-सामने हैं, जिससे गठबंधन में दरार साफ दिख रही है.
राजनीतिक गलियारों में भुसे के बयान को शिंदे खेमे की बेचैनी और भविष्य की महत्वाकांक्षा का खुला संकेत माना जा रहा है. 2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सबसे बड़ी पार्टी बनकर देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनवाया था, जबकि शिंदे को उपमुख्यमंत्री पद से संतोष करना पड़ा था. तब से शिंदे गुट के नेता लगातार यह संदेश दे रहे हैं कि उनकी पार्टी ने सबसे ज्यादा सीटें जीती थीं और मुख्यमंत्री पद उनका हक था.
नंदुरबार की रैली में भुसे ने जहां एक तरफ शिंदे को जननेता बताया, वहीं अप्रत्यक्ष रूप से मौजूदा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा, “कुछ लोग कुर्सी पर बैठकर सिर्फ फोटो खिंचवाते हैं, लेकिन जनता जानती है कि असली काम किसने किया.”