तिरुपति मंदिर के शुद्धीकरण की बात क्यों करने लगे चंद्रबाबू नायडू, जानिए क्या है इसके पीछे का राजनीतिक कारण?

Tirupati Temple: आंध्र प्रदेश के नए मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू बीते गुरुवार को परिवार के साथ भगवान वेंकटेश्नवर स्वामी का दर्शन करने तिरुपति मंदिर गए थे. यहां पर उन्होंने मंदिर का शुद्धीकरण कराने की भी बात कही है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर मंदिर में ऐसा क्या हो गया, जिसके कारण शुद्धीकरण आवश्यक है. इसके साथ ही उन्होंने मंदिर के ट्रस्ट में काफी गड़बड़ियां होने की भी बात कही है. आइए जानते हैं कि इसका राजनीतिक कारण क्या है. 

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Tirupati Temple: आंध्र प्रदेश के नए मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कार्यभार संभाल लिया है. इसके साथ ही वह बीते गुरुवार को अपने परिवार के साथ तिरुपति मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के दर्शन करने गए थे. इस दौरान चंद्रबाबू नायडू ने मंदिर का शुद्धीकरण कराने की बात कही है. उन्होंने कहा है कि कई चीजें गलत हुई हैं, अब उन्हें दूर किया जाएगा. हम हिंदू आस्था की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं. उन्होंने आरोप लगाते हुए यह भी कहा कि तिरुपति देवस्थानम के ट्रस्ट में काफी गड़बड़ियां पाई गई हैं.

उन्होंने कहा कि जल्द ही इनको दूर किया जाएगा. उन्होंने पिछली जगन मोहन रेड्डी की सरकार पर अप्रत्यक्ष रूप से हमला बोला है. उन्होंने कहा कि वे तिरुमला में करप्शन खत्म करने और हिंदू आस्था की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं. उनके इस प्रकार के बयान के पीछे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता प्रमुख कारण है. वे पिछली सरकार में हुए बदलावों को खारिज करने की .योजना बना रहे हैं. 

पूर्व सरकार पर साधा निशाना

सीएम चंद्रबाबू नायडू ने पिछले सरकार पर निशाना साधते हुए यह आरोप लगाया है कि तिरुपति तिरुमला देवस्थानम में जगनमोहन रेड्डी की सरकार ने भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया है. अब उसे दूर किया जाएगा और राज्य में सफाई अभियान चलाया जाएगा. उन्होंने कहा कि तिरुमल में अब सिर्फ गोविंदा नाम ही गूंजेगा. पवित्र तिरुमला को खराब करना ठीक बात नहीं है, जब आप यहां बैठें तो बैंकुठ जैसा आपको महसूस हो. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि तिरुमला में सिर्फ ओम नमो वेंकटेशाय गूंजना चाहिए. 

बाजार के हवाले कर दिया मंदिर!

रेड्डी सरकार पर आरोप लगाते हुए नायडू ने कहा कि बीते 5 सालों में यहां की व्यवस्था काफी खराब हो गई है. मंदिर को बाजार के हवाले कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि यहां प्रसाद अच्छी क्वॉलिटी का हो और इसके रेट नहीं बढ़ने चाहिए. दर्शन का टिकट ब्लैक मार्केट में नहीं बिकना चाहिए. 

पिछली सरकार के इस फैसले से बढ़ा था विवाद

जगनमोहन सरकार के समय पर तिरुपति से वाईएसआर कांग्रेस के विधायक करुणाकर रेड्डी को मंदिर के ट्रस्ट का अध्यक्ष बना दिया गया था. उस समय टीडीपी नेताओं ने इसका काफी विरोध किया था. टीडीपी के सचिव बुची रामप्रसाद ने कहा था कि करुणाकर रेड्डी तो ईसाई धर्म को मानते हैं. हिंदू धर्म से उनका कोई भी कनेक्शन नहीं है, फिर भी उन्हें ट्रस्ट का अध्यक्ष बना दिया गया था. 

छिपा है राजनीतिक कारण 

चंद्रबाबू नायडू के तिरुपति मंदिर को लेकर दिए गए बयान का बड़ा राजनीतिक कारण है. दरअसल आंध्र प्रदेश की 8.24 करोड़ आबादी में से 82 फीसदी हिंदू हैं. इस कारण यह फैसला प्रदेस की राज्य की सबसे बड़ी आबादी को लुभाएगा. इसके साथ ही चंद्रबाबू चौथी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं और उन्होंने पिछली सरकार के कई फैसलों को रद्द करने का निर्णय लिया है.

देश का है सबसे अमीर मंदिर 

तिरुपति में भगवान वेकेंटेश्वर विराजमान हैं.यहां पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का मिश्रित स्वरूप है. इसी कारण भगवान ऊपर साड़ी और नीचे धोती पहनते हैं. यह देश का सबसे अमीर मंदिर है. यहां रोजाना औसतन 60 हजार श्रद्धालु आते हैं. हर साल देश के सभी हिस्सों से करीब 3 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु तिरुपति बालाजी मंदिर आते हैं. इस मंदिर के पास 37 हजार करोड़ रुपये की प्रापर्टी है. यहां साल में 1500 करोड़ रुपये से अधिक का चढ़ावा आता है. इसके साथ ही मंदिर के पास 10.5 टन सोना है. तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम ट्रस्ट भक्तों को भोजन, संस्थान की देखरेख आदि पर 4000 करोड़ रुपये खर्च करता है. पिछले साल टीटीडी बोर्ड ने 4,411 करोड़ रुपये का बजट इसके लिए पास किया था. 

Disclaimer : यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.  theindiadaily.com  इन मान्यताओं और जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.