JDU से अलग रुख, मोदी सरकार पर सवाल, किन वजहों से KC त्यागी को देना पड़ा इस्तीफा?

गठबंधन का धर्म, राजनीतिक पार्टियों को निभाने में कुछ कुर्बानियां देनी पड़ती हैं. कुछ ऐसा ही हाल, बिहार की सत्तारूढ़ पार्टी जनता दल यूनाइडेट का हुआ है. जिस केसी त्यागी के बयान, सरकार की हर नीतियों पर सबसे पहले सामने आते थे, उनकी छुट्टी हो गई है. राजनीतिक गलियारों में ऐसी चर्चा है कि उन्होंने खुद इस्तीफा नहीं दिया है बल्कि उन्हें देने के लिए कहा गया है. क्या है पूरा मामला, आइए समझते हैं.

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बिहार से आकर अगर कोई दिल्ली में नीतीश कुमार की मजबूत आवाज, नेशनल मीडिया में रखता है, तो वे केसी त्यागी हैं. उन्होंने अचानक, रविवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. केसी त्यागी ने ऐलान किया कि वे पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे रहे हैं. उन्होंने इस्तीफा देते हुए कहा कि वे पार्टी प्रवक्ता के तौर पर अपने पद से न्याय नहीं कर पा रहे हैं इसलिए वे पद से इस्तीफा दे रहे हैं. उनकी जगह, अब पार्टी के ही सीनियर नेता राजीव रंजन प्रसाद लेंगे.

ऐसा दो साल में दूसरी बार हो रहा है, जब किसी राष्ट्रीय प्रवक्ता की भूमिका बदली हो. मार्च 2023 में भी वे पद से हटे थे लेकिन सीएम नीतीश कुमार के हस्तक्षेप के बाद वे फिर से पार्टी प्रवक्ता बना दिए गए थे. केसी त्यागी और नीतीश कुमार की यारी पुरानी है. दोनों आंदोलन के दिनों से ही साथ रहे हैं. केसी त्यागी साल 1984 में अपना पहला चुनाव जीते थे. वे पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के अनाधिकारिक प्रेस सलाहकार भी रह चुके हैं. वे बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर जैसे दिग्गज नेताओं के साथ काम कर चुके हैं. आइए जानते हैं कि उन्हें इस्तीफा क्यों देना पड़ा है. 

एनडीए से अलग बयान देना पड़ा भारी 

केसी त्यागी, अपने समाजवादी रुख पर कायम रहे, जबकि उनकी पार्टी का गठबंधन, धुर राष्ट्रवादी पार्टी के साथ है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं में उनके कुछ बयानों को लेकर आक्रोश पनपा था. अग्निवीर से लेकर लैटरल एंट्री तक, उन्होंने कई ऐसे बयान दिए जो बीजेपी नेतृत्व को रास नहीं आया. जब नीतीश कुमार गठबंधन धर्म में है, तब केसी त्यागी के बयान, पार्टी की मुश्किलों को बढ़ाने वाले रहे हैं. 

क्या विपक्ष के करीबी बन गए थे केसी त्यागी?

एक वक्त ऐसा लगा कि केसी त्यागी का सरकार की हर नीतियों को लेकर स्टैंड वही है, जो विपक्षी नेताओं का है. विदेश नीति से लेकर शिक्षा नीति तक, उनके बयान ऐसे रहे, जिन्हें एनडीए सरकार बर्दाश्त ही नहीं कर पाई. जेडीयू और एनडीए के भीतर उनके बयानों को लेकर मतभेद आने लगे. वे अग्नीवीर पर भी बयान देते और फिलिस्तीन पर भी. उन्होंने साफ कह दिया कि केंद्र सरकार को इजरायल की मदद नहीं करनी चाहिए, फिलिस्तीन के हक में खड़ा होना चाहिए. 

केसी त्यागी के वे बयान, जिन्होंने कराई उनकी छुट्टी!

- सरकार का गठन हो चुका था. केसी त्यागी पार्टी के राष्ट्रीय वक्ता थे. 4 जून को सरकार बनाने की कवायद के बीच ही उन्होंने कह दिया कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिले और अग्निवीर योजना वापस हो. यही मांग तो विपक्ष भी करता है. यह एनडीए से अलग रुख था.

- केसी त्यागी ने 8 जून को दावा किया था कि नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री बनाने के लिए विपक्ष बेचैन है, उनकी ओर से ऑफर भी मिल चुका है लेकिन केसी त्यागी ने इनकार कर दिया. 

- केसी त्यागी लैटरल एंट्री पर पार्टी लाइन से अलग हटकर सोचते थे. समान नागरिक संहिता, अनुसूचित जाति, जनजाति पर आरक्षण और क्रिमी लेयर को लेकर भी उनका सोचना अलग था. 

- 25 अगस्त को उन्होंने जो कहा, उस पर हंगामा मच गया. उन्होंने कह दिया कि भारत को इजराइल पर अलग सोचने की जरूरत है. भारतीय सेना को इजराइली सेना की मदद नहीं करनी चाहिए. उन्होंने इजराइल को हथियारों की आपूर्ति को रोकने के लिए इंडिया गठबंधन के नेताओं के साथ एक बयान पर साइन भी किया था.

कौन हैं केसी त्यागी?

केसी त्यागी, समाजवादी पार्टी के पुराने नेताओं में से एक हैं. साल 1977 के दौर तक उनकी राजनीतिक पकड़ अपने शीर्ष पर थी. उन्होंने साल 1984 में गाजियाबाद हापुड़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था लेकिन चुनाव हार गए थे. साल 1989 में वे राष्ट्रीय महासचिव बने. 2023 में एक बार उन्हें पद से हटाया गया था, अब दोबारा वे खुद ही हट गए.