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मिलिंद देवड़ा ने BJP की बजाय शिवसेना को क्यों चुना? जानें क्या है इनसाइड स्टोरी?

कांग्रेस से इस्तीफे देने के बाद मिलिंद देवड़ा ने बीजेपी के बजाय शिवसेना का दामन थामा. जिसके बाद तरह-तरह के इसके सियासी मायने और मतलब नीकाले जाने लगे है. अब सवाल यह उठता है कि मिलिंद देवड़ा ने बीजेपी की बजाय शिवसेना को क्यों चुना?

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Avinash Kumar Singh
Milind Deora

हाइलाइट्स

  • CM शिंदे के साथ वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में गए है मिलिंद देवड़ा
  • व्यापारिक नेताओं के साथ मिलिंद देवड़ा के अच्छे संबंध

नई दिल्ली: पूर्व केंद्रीय मंत्री मिलिंद देवड़ा ने कांग्रेस से इस्तीफे देने के बाद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को ज्वाइन किया है. बीते दिनों सोशल मीडिया पर टीम राहुल की एक तस्वीर वायरल हुई. जिसमें मिलिंद देवड़ा, ज्योतिरादित्य सिंधिया, आरपीएन सिंह, जितिन प्रसाद और सचिन पायलट के साथ नजर आ रहे हैं. सचिन पायलट को छोड़कर टीम राहुल के सभी नेता पार्टी छोड़ चुके हैं. बीजेपी ज्वाइन कर चुके ज्योतिरादित्य सिंधिया, आरपीएन सिंह और जितिन प्रसाद के इतर मिलिंद देवड़ा शिवसेना के बैनर तले अपने सियासी सफर को आगे बढ़ाने का विकल्प चुना है.

जानें मिलिंद देवड़ा ने BJP की बजाय शिवसेना को क्यों चुना?

कांग्रेस से इस्तीफे देने के बाद मिलिंद देवड़ा ने बीजेपी के बजाय शिवसेना का दामन थामा. जिसके बाद तरह-तरह के इसके सियासी मायने और मतलब नीकाले जाने लगे है. अब सवाल यह उठता है कि मिलिंद देवड़ा ने बीजेपी की बजाय शिवसेना को क्यों चुना? ऐसा कहा जा रहा है कि शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना महाराष्ट्र की एकमात्र पार्टी है जो भारत के व्यापारिक समुदाय के भीतर अच्छे संबंधों वाले और फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाले मिलिंद देवड़ा के कौशल का उपयोग कर सकती है. बीते 2019 के लोकसभा चुनाव में मुकेश अंबानी ने मिलिंद देवड़ा का समर्थन किया था. जो यह दिखाता है कि देवड़ा परिवार का उद्योगपतियों के साथ कैसे संबंध है. यही वजह है कि शिव सेना में शामिल होने के ठीक दो दिन बाद मिलिंद देवड़ा वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में हिस्सा लेने के लिए दावोस पहुंचे हुए है. 

CM शिंदे के साथ वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में गए है मिलिंद देवड़ा

महाराष्ट्र सरकार के उद्योग मंत्री उदय सामंत ने कहा कि मिलिंद देवड़ा अपने निजी खर्च पर दावोस में हैं और अपने पिता मुरली देवड़ा के कारण विश्व आर्थिक मंच के संस्थापक के साथ उनके अच्छे संबंध हैं. मिलिंद देवड़ा का दावोस जाना इस बात के संकेत है कि शिंदे की शिवसेना को एक ऐसे नेता की जरूरत थी जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर पार्टी का प्रतिनिधित्व कर सके.

व्यापारिक नेताओं के साथ मिलिंद देवड़ा के अच्छे संबंध 

मिलिंद देवड़ा के शिवसेना में शामिल होने से पार्टी को व्यापारिक नेताओं और दिल्ली के राजनीतिक हलकों के साथ गहरे संबंधों के साथ एक बेहद जरूरी दोस्ताना चेहरा मिल गया है. सरकार में अपने कार्यकाल के दौरान और बाद में देवड़ा आर्थिक मुद्दों पर एक उदारवादी आवाज रहे हैं. खुद को एक दूरदर्शी, युवा, पेशेवर और महानगरीय नेता के रूप में स्थापित करने वाले मिलिंद देवड़ा लुटियंस दिल्ली की पॉलिटिक्स से लेकर महाराष्ट्र की सियासत में CM एकनाथ शिंदे के लिए एसेट साबित हो सकते है. 

राज्यसभा सांसद बन सकते है मिलिंद देवड़ा?

सियासी चर्चाओं की मानें तो देवड़ा ने शिंदे के बेटे सांसद श्रीकांत शिंदे के साथ एक मजबूत रिश्ता विकसित किया है और पार्टी आगामी चुनावों में मिलिंद देवड़ा को उच्च सदन राज्यसभा के लिए नामित करेगी. देवड़ा संसद में वापस जाने के इच्छुक हैं और यही कारण है कि उन्होंने पार्टियां बदल ली. मिलिंद देवड़ा ने 2004 और 2009 में दक्षिण मुंबई लोकसभा सीट जीती. 2014 और 2019 में उन्हें अरविंद सावंत से करारी हार का सामना करना पड़ा. अभी तक यह तय नहीं है कि देवड़ा को यह सीट मिलेगी. BJP ने अभी तक मुंबई दक्षिण पर अपना दावा नहीं छोड़ा है और बातचीत के दौरान वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर और मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा जैसे नाम इस सीट पर सामने आए रहे है. ऐसे में उस स्थिति में देवड़ा की संसद में वापसी जून और जुलाई में होने वाले राज्यसभा चुनाव के जरिये हो सकती है.