BJP and TMC: पश्चिम बंगाल में सोमवार 5 अगस्त को विधानसभा में राज्य के विभाजन की मांग के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया गया. इस प्रस्ताव का उद्देश्य राज्य का किसी भी हालात में बंटवारा न करना है. खास बात यह है कि इस प्रस्ताव में विपक्ष में बैठी बीजेपी भी TMC के साथ हाथ से हाथ मिलाती दिखी. दोनों के बीच इस मुद्दे को लेकर बनी सहमति राजनीतिक गलियारे में चर्चा का विषय बनी है. सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कैसे एक प्रस्ताव पर एक दूसरे के मुखर आलोचक टीएमसी और BJP सहमत हो गए?
पश्चिम बंगाल की विधानसभा में यह प्रस्ताव कई भाजपा नेताओं - केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार, सांसद निशिकांत दुबे और विधायक गौरी शंकर घोष - द्वारा धन की कमी से लेकर धार्मिक जनसांख्यिकी में बदलाव जैसे मुद्दों का हवाला देते हुए उत्तर बंगाल के कई जिलों के लिए विशेष पैकेज और केंद्र शासित प्रदेश या राज्य का दर्जा मांगने की पृष्ठभूमि में आया.
पश्चिम बंगाल के कई बीजेपी नेताओं पर ये आरोप लगता रहा है कि वो राज्य के पिछड़े जिलों को विकसित करने के लिए राज्य के बंटवारे की मांग करते हैं. बीजेपी प्रदेश अध्य सुकांत मजूमदार पर ये आरोप कई बार लगे हैं. उन्होंने कई बार राज्य के पिछड़े जिलों की बात करते हुए उन्हें विकसित करने के लिए कुछ अलग करने की बात कही. इसे लेकर शुभेंदू अधिकारी ने कहा कि मजूमदार ने कभी भी बंगाल विभाजन के पक्ष में कोई बयान नहीं दिया है. उन्होंने बस बंगाल के विकास के लिए धनराशि की बात कही थी.
अधिकारी ने इस प्रस्ताव की आलोचना करते हुए इसे "राजनीतिक" और "एक पार्टी का पर्चा" करार दिया. उन्होंने बताया कि सुकांत मजूमदार द्वारा प्रधानमंत्री को दिए गए प्रस्ताव में बंगाल के विभाजन का कोई जिक्र नहीं था.
विधानसभा में लाए गए इस प्रस्ताव पर 2 घंटे तक चर्चा चली. विपक्ष ने इस प्रस्ताव पर भले सहमति दर्ज की. लेकिन सदन में दोनों पक्षों के बीच तीखी नोक झोंक देखने को मिली. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी ने इस लिए इस प्रस्ताव का समर्थन किया ताकि उस पर राज्य का बंटवारा करने के जो आरोप लगते रहे हैं वह उसे गलत साबित कर सकें.