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India Daily
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सबको अमित शाह वाला गृह मंत्रालय ही क्यों चाहिए? समझ लीजिए हाई डिमांड की वजह

Home Ministry: चुनाव नतीजों के बाद से सबसे ज्यादा चर्चा केंद्रीय गृह मंत्रालय को लेकर हो रही है. पिछले 5 साल से गृह मंत्रालय चला रहे अमित शाह के इस मंत्रालय पर बीजेपी के सहयोगी दलों की नजरें टिकी हुई हैं और वे इसे ही मांग रहे हैं.

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Nilesh Mishra
Amit Shah
Courtesy: Social Media

भारतीय जनता पार्टी (BJP) को अकेले बहुमत न मिलने की वजह से अब वह अपने गठबंधन सहयोगियों के दबाव में आ गई है. सरकार बनाने के लिए बीजेपी को कम से कम 32 सांसदों के समर्थन की जरूरत है. इस स्थिति में उस तेलुगू देशम पार्टी (TDP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) जैसी पार्टियों को खास तवज्जो देनी पड़ रही है. चर्चाएं हैं कि गठबंधन सरकार में शामिल होने वाले दलों की ओर से कई बड़े मंत्रालयों की मांग की जा रही है. 5 सांसदों वाले चिराग पासवान भी अब बड़ी डिमांड रख रहे हैं. वहीं, सबसे ज्यादा चर्चा गृह मंत्रालय को लेकर है. सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि टीडीपी और जेडीयू जैसे दलों की नजर गृह मंत्रालय पर है. पिछले 5 साल से नरेंद्र मोदी के सबसे खास माने जाने वाले अमित शाह के पास रहा है.

पिछले पांच सालों में अनुच्छेद 370 खत्म करने, कई राज्यों से AFSPA हटाने, इंटेलिजेंस ब्यूरो चलाने और केंद्र शासित प्रदेशों में अमित शाह का सीधा दखल रहा है. 2024 के चुनाव नतीजों के आधार पर कयास लगाए जा रहे हैं कि अगर यह मंत्रालय बीजेपी के पास से जाता है तो उसकी स्थिति कमजोर होगी. वह सीधे तौर पर इंटेलिजेंस, नार्कोटिक्स, FCRA, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून से जुड़े फैसलों के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेशों में भी उतना दखल नहीं दे पाएगी. आइए समझते हैं कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास कौन-कौन से अहम विभाग हैं जो उसे इतना ताकतवर और अहम बनाते हैं.

आंतरिक सुरक्षा

देश में आंतरिक सुरक्षा का पूरा कंट्रोल केंद्रीय गृह मंत्रालय के ही पास होता है. राज्यों की पुलिस भले ही राज्य सरकार के अधीन हो लेकिन जिले की पुलिस का मुखिया यानी पुलिस अधीक्षक IPS होता है. यह इंडियन पुलिस सर्विस यानी IPS केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आती है. इसके अलावा, केंद्रीय पुलिस बल में आने वाले CRPF, CISF, ITBP समेत अन्य संगठन भी गृह मंत्रालय के अंतर्गत आते हैं. इन बलों के अलावा, आतंक विरोधी विभाग, बॉर्डर मैनेजमेंट और इंटेलिजेंस ब्यूरो भी केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत ही काम करते हैं.

केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय, आपदा प्रबंधन, आधिकारिक भाषा, पद्म पुरस्कार, पुलिस सेवा मेडल, हथियारों के लाइसेंस, FCRA लाइसेंस, नागरिकता जैसे विभाग भी इसी मंत्रालय के तहत आते हैं, ऐसे में गाहे-बगाहे बीजेपी की नीतियों का विरोध करने वाले नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू की नजरें इसी पर टिकी हुई हैं. अगर बीजेपी गृह मंत्रालय गंवाती है तो अमित शाह सरकार में कमजोर हो जाएंगे और सरकार चलाने के बावजूद नरेंद्र मोदी उस तरह सख्त कार्रवाई नहीं कर पाएंगे.

केंद्र-शासित प्रदेशों पर नियंत्रण

केंद्र शासित प्रदेशों में सरकार चलाने के लिए उप-राज्यपाल तैनात किए जाते हैं. दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में मुख्यमंत्री का प्रावधान है लेकिन इन जगहों पर तैनात होने वाले उपराज्यपालों से मुख्यमंत्री का टकराव लगातार होता रहा है. बिना विधानसभा केंद्र शासित प्रदेशों में सीधे गृह मंत्रालय ही कामकाज देखता है. ऐसे में अगर यह भी बीजेपी के कंट्रोल से जाता है तो टकराव कम हो सकता है.

ऐसी स्थिति में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपराज्यपाल के संबंधों में भी सुधार देखने को मिल सकते हैं. हालांकि, ऐसा तभी संभव है जब आम आदमी पार्टी उस पार्टी से अपने संबंध बेहतर कर पाए जिसके पास यह मंत्रालय जाए.

गृह मंत्रालय के पास कौन-कौन से काम हैं:-

  • भारतीय पुलिस सेवा
  • केंद्रीय पुलिस बल
  • केंद्र शासित प्रदेश
  • केंद्र-राज्य संबंध
  • सीमा प्रबंधन
  • स्वतंत्रतता सेनानियों की पेंशन और अन्य मुद्दे
  • आपदा प्रबंधन
  • आतंकवाद निरोधी विभाग
  • साइबर एंड इन्फॉर्मेंशन सिक्योरिटी डिवीजन
  • इंटेलिजजेंस ब्यूरो
  • हथियार लाइसेंस
  • FCRA
  • आधिकारिक भाषा
  • राष्ट्रीय सुरक्षा कानून
  • नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो
  • पद्म पुरस्कार, पुलिस सेवा मेडल
  • नागरिकता, CAA
  • AFSPA