जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला सरकार पर बड़े संकट का दावा किया जा रहा है. कहा जा रहा है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के 25 विधायकों ने अपनी मांगों को लेकर सीएम अब्दुल्ला को 14 दिन का अल्टीमेटम दिया है. असंतुष्ट विधायकों का कहना है कि अगर उनकी मांगे पूरी नहीं हुईं तो वे अपना समर्थन वापस ले सकते हैं.
नेशनल कॉन्फ्रेंस के बागी विधायकों की मांग है कि मौजूदा सभी मंत्रियों और मुख्यमंत्री के सलाहकार को भी उनके पद से हटाया जाए और पूरी मंत्रीपरिषद को नए तरीके से गठित किया जाए. विधायकों की मांग के कि मंत्रीपरिषद का गठन पूरे विधायक दल से चर्चा करके और पारदर्शी तरीके से किया जाए.
सूत्रों की मानें तो असंतुष्ट विधायक चाहते हैं कि सरकार में फैसले किसी चुनिंदा समूह के जरिए एकतफा तरीके से ना लिए जाएं और योग्यता के आधार पर मंत्रियों को जिम्मेदारी दी जाए.
बागी गुट का कहना है कि सरकार घोषणापत्र में किए गए अपने वादों विशेषतौर पर अनुच्छेद 370 और 35A जैसे जरूरी मुद्दों को केंद्र सरकार के सामने मजबूती से उठाए. सूत्रों की मानें तो अगले 14 दिनों में अगर इन मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो बागी विधायक राजभवन मार्च कर अब्दुल्ला सरकार से अपना समर्थन वापस लेने की घोषणा कर सकते हैं.
अब्दुल्ला की पार्टी के सामने एक और चुनौती लोकसभा सांसद अगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी के 3 नवंबर को इस्तीफा देने के ऐलान से भी जुड़ी है. उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर वैचारिक प्रतिबद्धताओं को कमजोर करने और 5 अगस्त 2019 के बाद किए गए संवैधानिक संशोधनों को चुनौती देने के जनादेश से पीछे हटने का आरोप लगाते हुए पार्टी और लोकसभा सीट दोनों से इस्तीफा देने की बात कही है.
जम्मू-कश्मीर की 90 सदस्यीय विधानसभा में नेशनल कॉन्फ्रेंस के 41 विधायक हैं. अगर 25 विधायक समर्थन वापस लेते हैं तो अब्दुल्ला सरकार के सामने बहुमत का संकट खड़ा हो सकता है.