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सुप्रीम कोर्ट ने लगाई लताड़ तो ठिकाने पर आए महाराष्ट्र स्पीकर राहुल नार्वेकर, बोले- फैसला लेने में देरी नहीं करेंगे लेकिन....

Maharashtra News: मामले में देरी होने पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने नार्वेकर को फटकार लगाई थी और मामले पर फैसला लेने में समय सीमा निर्धारित करने को कहा था.

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Sagar Bhardwaj
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई लताड़ तो ठिकाने पर आए महाराष्ट्र स्पीकर राहुल नार्वेकर, बोले- फैसला लेने में देरी नहीं करेंगे लेकिन....

Maharashtra News: महाराष्ट्र सीएम एकनाथ शिंदे की पार्टी शिवसेना के विधायकों की अयोग्यता पर फैसला लेने में देरी होने पर सुप्रीम कोर्ट से फटकार लगने पर स्पीकर राहुल नार्वेकर पटरी पर लौटते दिख रहे हैं.

'जल्दबाजी में फैसला किया तो अन्याय हो सकता है'


मंगलवार को महाराष्ट्र स्पीकर राहुल नार्वेकर ने कहा कि वे शिवसेना विधायकों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने में देरी नहीं करेंगे, हालांकि वह इस मसले पर जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेंगे क्योंकि ऐसा करने से अन्याय हो सकता है.

उद्धव ठाकरे से बगावत करते हुए एनडीए में शामिल हो गए थे शिंदे


बता दें कि कुछ महीनों पहले एकनाथ शिंदे अपने कुछ समर्थक विधायकों के साथ शिवसेना को तोड़कर एनडीए में शामिल हो गए थे.

शिंदे की इस बगावत के बाद शिवसेना दो दलों शिवसेना और शिवसेना (यूबीटी) में टूट गई थी.

शिंदे की बगावत के बाद शिवसेना अल्पमत में आ गई थी और उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था.

इसके बाद एनडीए में शामिल हुए एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बना दिए गए थे.

ठाकरे गुट ने शिंदे गुट के विधायकों की अयोग्यता को लेकर दायर की थी याचिकाएं

शिवसेना यूबीटी ने बागी शिंदे गुट के विधायकों की अयोग्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं, जिन पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने विधायकों की अयोग्यता पर फैसला लेने की जिम्मेदारी महाराष्ट्र स्पीकर राहुल नार्वेकर को दे दी थी, लेकिन राहुल नार्वेकर ने अभी तक सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया है.

मामले में देरी होने पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी फटकार

मामले में देरी होने पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने नार्वेकर को फटकार लगाई थी और उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए एक सप्ताह के भीतर मामले को उनके समक्ष सूचिबद्ध करने और अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने के लिए समयसीमा निर्धारित करने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने कहा था कि यह अनिश्चितकाल के लिए नहीं चल सकता.

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