भारत में कैसे होती है बारिश? समझ लीजिए मानसून के आने और जाने का पूरा सिस्टम

Monsoon In India: भारत में बारिश कराने का सबसे बड़ा जिम्मेदार मानसून है. हर साल मानसून आने के बाद ही दक्षिण-पश्चिम की ओर से बारिश की शुरुआत होती है और जुलाई-अगस्त तक उत्तर भारत में भी बारिश होने लगती है.

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'मानसून आने वाला है..., मानसून आएगा तभी बारिश होगी..., मानसून 4 दिन में दिल्ली पहुंचेगा...' ऐसी बातें हर साल मई-जून में होने लगती हैं. भारत के हिसाब से देखें तो देश के ज्यादातर हिस्से मानसून से होने वाली बारिश पर निर्भर हैं. मानसून एक बार आता है तो झमाझम बारिश होती है, जब यही मानसून लौटता है तो फिर से बारिश होती है लेकिन इन दोनों बारिशों में थोड़ा अंतर होता है. इस बार भी मानसून आ चुका है और केरल के तट से लगते इलाकों में बारिश शुरू हो चुकी है. मौसम विभाग का अनुमान है कि जैसे-जैसे मानसून देश के अंदरूनी हिस्सों मे पहुंचेगा, वैसे-वैसे गर्मी से भी राहत मिलेगी.

मौसम विभाग के पुर्वानूमान की मानें तो मानसून 31 मई तक आ जाना चाहिए. केरल के तटीय इलाकों में 30 मई को ही मानसून पहुंच गया था. स्काई मेट की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य अरब सागर, दक्षिण अरब सागर, लक्षद्वीप और केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, दक्षिण-पश्चिम और मध्य बंगाल की खाड़ी, उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी के शेष हिस्सों, असम और मेघालय, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के कुछ हिस्सों में भी अगले दो दिनों में मानसून वाली बारिश शुरू हो जाएगी.

देश के कई हिस्सों में मानसून के आने से पहले हल्की फुहार आने लगी है. बुधवार के दिन थोड़ी सी बारिश आने की वजह से दिल्लीवासियों को लू और झुलसाने वाली हवाओं से थोड़ी राहत मिल गई है. हालांकि, मानसून अभी दिल्ली नहीं पहुंचा है. मौसम विभाग के मुताबिक, केरल के तट पर मानसून के आने के लगभग तीन से चार हफ्ते के बाद यह दिल्ली तक पहुंचता है.

कैसे होती है बारिश?

दुनियाभर में बारिश की प्रक्रिया यह है कि समुद्र या अन्य जलाशयों का पानी वाष्पित होकर ऊपर उठता है. धीरे-धीरे बादल बनते हैं और ये बादल हवाओं के साथ आगे बढ़ते हैं. बड़े पैमाने पर देखें तो समुद्र का पानी भाप बनकर उड़ता है और बादल बनाता है. समुद्र के ऊपर बनने वाले ये बादल हवा के माध्यम से स्थल यानी जमीनी इलाकों की ओर बढ़ते हैं. समय और जलवायु के मुताबिक, जब इनमें नमी की मात्रा बढ़ जाती है तो बारिश होती है.

भारत तीन तरफ से समुद्रों से घिरा हुआ है. पश्चिम की ओर अरब की खाड़ी है, पूरब की ओर बंगाल की खाड़ी और नीचे यानी दक्षिण की ओर हिंद महासागर है. हिंद महासागर और अरब सागर की ओर से उठने वाली हवाओं के साथ आने वाले बादलों के समूह जब दक्षिण-पश्चिम के तट पर पहुंचते हैं तो इन्हें मानसून कहा जाता है. मई-जून से सितंबर के बीच ये हवाएं भारत के साथ-साथ पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी बारिश कराती हैं.

सबसे पहले मानसून की दस्तक

मानसून सबसे पहले केरल के समुद्री तटों को प्रभावित करता है. उसके बाद ये मानसूनी हवाएं भारत के दक्षिणी और उत्तरी इलाकों की तरफ बढ़ती हैं. इस मौसम के दौरान पश्चिमी तट से लगे राज्यों में मानसून आता है. मानसून के साथ आने वाली हवाएं बादल लेकर आती हैं और जून-जुलाई में झमाझम बारिश कराती हैं. यही कारण है कि जुलाई और अगस्त में उत्तर भारत के ज्यादातर राज्यों में बारिश का मौसम होता है. 

भारतीय मानसून के प्रकार

भारत में मानसून दो प्रकार के होते हैं. इन्हें समर मानसून और विंटर मानसून कहा जाता है. समर मानसून की शुरुआत जून के महीने में होती है. यह भारत में दक्षिण-पश्चिम से प्रवेश करता है. वहीं, जुलाई के अंतिम में उत्तर भारत तक पहुंचता है. विंटर मानसून अक्टूबर से दिसंबर के महीने में आता है. इसकी दिशा समर मानसून से ठीक उलट होती है. समर मानसून की तुलना में इससे कम बारिश होती है.

कैसे तैयार होता है मानसून?

गर्मी के मौसम में जब हिंद महासागर में सूर्य विषुवत रेखा के ठीक ऊपर होता है तो मानसून बनता है. इस प्रक्रिया में समुद्र का तापमान 30 डिग्री तक पहुंच जाता है. उस दौरान धरती का तापमान 45-46 डिग्री तक पहुंच चुका होता है. ऐसी स्थिति में हिंद महासागर के दक्षिणी हिस्से में मानसूनी हवाएं सक्रिय हो जाती हैं. ये हवाएं आपस में क्रॉस करते हुए विषुवत रेखा पार कर एशिया की तरफ बढ़ने लगती हैं.

इसी दौरान समुद्र के ऊपर बादलों के बनने की प्रक्रिया शुरू होती है. विषुवत रेखा पार करके हवाएं और बादल बारिश करते हुए बंगाल की खाड़ी और अरब सागर का रुख करते हैं. इस दौरान देश के तमाम हिस्सों का तापमान समुद्र तल के तापमान से अधिक होता है. तापमान ज्यादा होने की स्थिति में दबाव कम होता है और समुद्र का तापमान कम होने की वजह से वहां दबाव ज्यादा होता है. ऐसी स्थिति में हवाएं समुद्र से जमीन की ओर बहने लगती हैं. ये हवाएं समुद्र के जल के वाष्पन से पैदा होने वाली वाष्प को सोख लेती हैं और धरती पर आते ही ऊपर उठती हैं और बारिश करती हैं.

भारत में मानसून का टाइम टेबल

अरब सागर से आने वाली हवाएं उत्तर की ओर बढ़ते हुए जून माह के पहले सप्ताह तक मुंबई पहुंचती हैं. मानसून जून के पहले सप्ताह तक असम आ जाता है. इसके बाद हिमालय से टकराने के बाद हवाएं पश्चिम की ओर मुड़ जाती हैं. मानसून कोलकाता शहर में मुंबई से कुछ दिन पहले ही पहुंच जाता है. मध्य जून तक अरब सागर से बहने वाली हवाएं सौराष्ट्र, कच्छ और मध्य भारत के प्रदेशों में फैल जाती हैं. इसके बाद बंगाल की खाड़ी और अरब सागर की हवाएं फिर एकसाथ होकर बहने लगती हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और पूर्वी राजस्थान मे जुलाई के पहले सप्ताह में बारिश हो जाती है. 

दिल्‍ली में मानसून कई बार पूर्वी दिशा से आता है और बंगाल की खाड़ी के ऊपर से बहने वाली धारा का हिस्‍सा होता है. कई बार दिल्ली में यह पहली बौछार अरब सागर  के ऊपर से बहने वाली धारा का हिस्‍सा बनकर दक्षिण दिशा से आती है. आधी जुलाई गुजरते-गुजरते मानसून कश्मीर और देश के बाकी बचे हुए हिस्‍सों में भी फैल जाता है.