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एक नहीं 11 एजेंसियों के जिम्मे हैं दिल्ली की नालियां, फिर भी 3 घंटे की बारिश ने राजधानी को बना दिया 'दरिया'

दिल्ली में करीब तीन घंटे की भारी बारिश ने यहां के लोगों को परेशान कर दिया है. कई सड़कें जलमग्न हो गईं तो कई घरों में पानी घुस गया. दिल्ली की ऐसी हालत तब है जब पीडब्लयूडी ने दावा किया कि उसने कुल 2,155 किलोमीटर में से 1,778 किलोमीटर नालों की डिसिल्टिंग का काम 83% पूरा कर लिया है. जगह-जगह जलभराव की वजह से दिल्ली में शुक्रवार को जाम की स्थिति बन गई थी. अभी अगले दो दिनों में और बारिश होने वाली है.

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एक नहीं 11 एजेंसियों के जिम्मे हैं दिल्ली की नालियां, फिर भी 3 घंटे की बारिश ने राजधानी को बना दिया 'दरिया'
Courtesy: SOCIAL MEDIA

राजधानी दिल्ली में मानसून की पहली बारिश ने भले ही गर्मी से राहत दे दी हो लेकिन करीब तीन घंटे की भारी बारिश ने यहां के लोगों को परेशान कर दिया है. कई सड़कें जलमग्न हो गईं तो कई घरों में पानी घुस गया. दिल्ली पीडब्लयूडी ने दावा किया था कि उसने कुल 2,155 किलोमीटर में से 1,778 किलोमीटर नालों में 83% डिसिल्टिंग का काम पूरा कर लिया है. PWD 1,356 किलोमीटर रिंग रोड, मुख्य सड़कों और 20 मीटर के अधिकार वाली सभी सड़कों का रख रखाव करता है. कुछ सड़कों का काम जिम्मा नगर निगम और अन्य एजेंसियों के पास भी है. 

PWD के सीनियर अधिकारियों के मुताबिक, विभागों की बहुलता, तालमेल की कमी, खराब ढांचा, डिजाइन और बढ़ती जनसंख्या के कारण ये सारी समस्याएं उत्पन्न होती हैं. वहीं एक और मुख्य कारण है लंबे समय से ड्रेनेज मास्टर प्लान. कई समस्याओं के कारण अभी तक इस पर काम नहीं किया जा सका है. 

'विभागों के बीच कोई तालमेल नहीं हो रहा..'

कम से कम 11 अलग-अलग एजेंसियां सड़कों पर नालियों की देखभाल करती है. पीडब्लयूडी के एक अधिकारी ने बताया, 'विभागों के बीच कोई तालमेल नहीं हो रहा. जैसे इस बात को लेकर अफवाह थी कि बारापुला नाला किस विभाग के अंतर्गत आता है. हम मुख्य वर्षा जल नालियों का प्रबंधन करते हैं लेकिन घरेलू सीवर का पानी अक्सर इसमें छोड़ दिया जाता है. इसके कारण नाला ओवरफ्लो हो जाता है और पानी सड़क पर आ जाता है'.

अधिकारी ने कहा, 'यमुना नदी के गेट और बारापुला नाले में कुछ समस्या उत्पन्न हुई, जो दक्षिण और नई दिल्ली में बाढ़ का कारण बनी'.

'एक एकीकृत मास्टर प्लान की जरूरत है...'

वहीं इस मुद्दे पर पीडब्लयूडी के पूर्व इंजीनियर-इन-चीफ अनंत कुमार ने कहा, 'दिल्ली में 228 मिमी बारिश हुई. शहर की जल निकासी व्यवस्था में (इसके लिए) क्षमता नहीं है कि इसे बाहर किया जाए या जमा किया जाए. आबादी के साथ ये समस्या भी बढ़ रही है. एक एकीकृत मास्टर प्लान की जरूरत है'.

कौन जिम्मेदार?

केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान के सीनियर प्रधान वैज्ञानिक और यातायात इंजीनियरिंग एंव सुरक्षा प्रभाव के पूर्व प्रमुख एस वेलमुरूगन ने कहा, जलनिकासी प्रणाली 1976 में डिजाइन की गई थी अब इसे नया रूप देने की जरूरत है. गाद निकालना, पानी निकालने के लिए पंप लगाना अस्थायी योजनाएं हैं, सरकार ने पिछले साल की बाढ़ से सबक नहीं लिया'. बता दें कि दिल्ली में नालों, सीवरेज और ड्रेनेज सिस्टम की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी, एमसीडी, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, डीडीए के पास है.