नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में आरक्षण व्यवस्था को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है. विधानसभा ने सोमवार को OBC आरक्षण से जुड़े दो महत्वपूर्ण संशोधन विधेयकों को मंजूरी दे दी. सरकार का कहना है कि यह कदम कलकत्ता हाई कोर्ट के 2024 के फैसले के अनुरूप उठाया गया है. नए कानून के लागू होने के बाद राज्य में OBC आरक्षण की संरचना में बदलाव होगा. साथ ही पिछड़े वर्गों की पहचान और सूचीकरण की प्रक्रिया में भी आयोग की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी.
राज्य विधानसभा में पारित नए विधेयकों के तहत OBC आरक्षण को 17 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया है. इसके साथ ही पूर्व में सूची में शामिल की गई 113 अतिरिक्त जातियों और उपजातियों को भी हटाने का निर्णय लिया गया है. सरकार का कहना है कि यह बदलाव न्यायालय के निर्देशों के आधार पर किया गया है और इसका उद्देश्य आरक्षण व्यवस्था को कानूनी रूप से मजबूत बनाना है.
सरकार ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश के बाद लिया गया, जिसमें केवल मूल 66 OBC श्रेणियों को वैध माना गया था. अदालत ने पिछली प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा था कि नई श्रेणियों को शामिल करने में निर्धारित मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया. इसी आधार पर अब आरक्षण व्यवस्था को पुराने ढांचे में वापस लाया गया है.
नए कानून के तहत पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग को केंद्रीय भूमिका सौंपी गई है. अब किसी भी नए समुदाय को OBC सूची में शामिल करने से पहले आयोग उसकी सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति का विस्तृत अध्ययन करेगा. आयोग की रिपोर्ट और सिफारिश के बाद ही राज्य सरकार अंतिम फैसला ले सकेगी. इससे प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और संस्थागत बनाने की कोशिश की गई है.
सरकार का आरोप है कि पिछली व्यवस्था में कई समुदायों को पर्याप्त जांच के बिना OBC सूची में जोड़ा गया था. इनमें बड़ी संख्या विभिन्न उपजातियों की थी. सरकार का कहना है कि यह कदम कानूनी प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है. हालांकि इस फैसले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं.
सरकार ने साफ किया है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण में कोई बदलाव नहीं किया गया है. भविष्य में यदि कोई समुदाय सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा पाया जाता है और आयोग उसकी सिफारिश करता है, तो उसे नियमों के तहत OBC सूची में शामिल किया जा सकेगा. अब सभी की नजर इस बात पर है कि नए प्रावधान लागू होने के बाद राज्य की आरक्षण व्यवस्था किस दिशा में आगे बढ़ती है.