केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूलों में नई थ्री लैंग्वेज पॉलिसी (Three Language Policy) लागू करने के लिए नई गाइडलाइन जारी कर दी है. अच्छी खबर यह है कि वर्तमान 10वीं के छात्रों पर यह नया नियम लागू नहीं होगा, जिससे बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे लाखों विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिली है.
CBSE के अनुसार, फिलहाल कक्षा 7वीं, 8वीं और 9वीं में पढ़ रहे छात्रों को 10वीं में पहुंचने पर तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी. यदि किसी छात्र ने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुनी हुई हैं, तो उसे एक अतिरिक्त भारतीय भाषा भी पढ़नी होगी. हालांकि, इस भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी.
बोर्ड ने बताया है कि नई भाषा नीति को आसान और छात्रों के लिए रुचिकर बनाया जाएगा. छात्रों को उनकी कक्षा के अनुसार पढ़ाई की सामग्री समय पर उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि उन्हें भाषा सीखने में किसी तरह की परेशानी न हो.
CBSE ने स्पष्ट किया है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 में 9वीं कक्षा के छात्रों की तीसरी भाषा (R3) का मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर होगा. जब यही छात्र 2027-28 में 10वीं कक्षा में जाएंगे, तब तीसरी भाषा की कोई बोर्ड परीक्षा नहीं ली जाएगी.
वहीं, वर्तमान में 7वीं और 8वीं में पढ़ रहे छात्र भी 9वीं और 10वीं में तीन भाषाएं पढ़ेंगे, जिनमें दो भारतीय भाषाएं होंगी. जिन छात्रों ने पहले से दो गैर-मातृभाषाएं चुनी हैं, उन्हें केवल एक भारतीय भाषा जोड़नी होगी और 10वीं तक उसी का अध्ययन करना होगा. इस भाषा का मूल्यांकन भी केवल स्कूल के आंतरिक आकलन के आधार पर होगा.
CBSE ने यह भी बताया कि NCERT सभी 22 निर्धारित भारतीय भाषाओं के लिए कक्षा 6 की विशेष किताबें तैयार कर रहा है. इसके अलावा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CwSN) को पहले की तरह सभी रियायतें मिलती रहेंगी. वहीं, विदेशों में स्थित CBSE स्कूलों और विदेश से भारत लौटने वाले छात्रों को तीसरी भाषा के रूप में भारतीय मातृभाषा पढ़ने से छूट दी गई है.