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सुवेंदु सरकार का बड़ा फैसला, सीबीआई को दी राज्य में जांच की मंजूरी

पश्चिम बंगाल सरकार ने सीबीआई को राज्य में कुछ विशेष मामलों में जांच की अनुमति देने का फैसला किया है. यह छूट मुख्य रूप से केंद्रीय कर्मचारियों और केंद्रीय उपक्रमों से जुड़े मामलों तक सीमित रहेगी.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
सुवेंदु सरकार का बड़ा फैसला, सीबीआई को दी राज्य में जांच की मंजूरी
Courtesy: pinterest

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की भूमिका को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसला लिया है. गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग की ओर से जारी नई अधिसूचना के तहत सीबीआई को कुछ श्रेणियों के मामलों में जांच करने की अनुमति दी गई है. यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है. हालांकि इस फैसले को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं लेकिन अधिसूचना का अध्ययन करने पर स्पष्ट होता है कि यह अनुमति सीमित दायरे में दी गई है.

केंद्र से जुड़े मामलों पर फोकस

नई अधिसूचना के अनुसार सीबीआई को उन मामलों की जांच करने का अधिकार दिया गया है जिनका संबंध केंद्र सरकार के कर्मचारियों या केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के अधिकारियों और कर्मियों से है. यदि किसी मामले में इन कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, अनियमितता या किसी अन्य अपराध के आरोप सामने आते हैं, तो सीबीआई जांच शुरू कर सकती है. इतना ही नहीं, यदि कोई निजी व्यक्ति या अन्य आरोपी केंद्रीय कर्मचारियों के साथ मिलकर अपराध करने के आरोप में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भी जांच की जा सकेगी. इस फैसले का उद्देश्य केंद्र से जुड़े मामलों में जांच प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना माना जा रहा है.

सामान्य सहमति की वापसी पर चर्चा

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को सामान्य सहमति की आंशिक वापसी के रूप में देखा जा रहा है. पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों ने सीबीआई की जांच के लिए दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली थी, जिसके कारण एजेंसी को कई मामलों में अलग से अनुमति लेनी पड़ती थी. अब पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जारी नई व्यवस्था ने कुछ श्रेणियों के मामलों में जांच का रास्ता आसान कर दिया है. हालांकि यह कदम पूरी तरह खुली छूट जैसा नहीं है, क्योंकि इसके दायरे और शर्तों को अधिसूचना में स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है.

राज्य कर्मचारियों पर बनी रहेगी पाबंदी

अधिसूचना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि राज्य सरकार के नियंत्रण में आने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के मामलों में सीबीआई को स्वतः जांच का अधिकार नहीं दिया गया है. यदि किसी राज्य सरकारी कर्मचारी से जुड़ा मामला सामने आता है, तो एजेंसी को जांच शुरू करने से पहले राज्य सरकार की लिखित मंजूरी लेनी होगी. इसका अर्थ है कि राज्य प्रशासन से जुड़े मामलों में पहले जैसी प्रक्रिया ही जारी रहेगी. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि सीबीआई को पश्चिम बंगाल में हर तरह की जांच के लिए पूरी स्वतंत्रता मिल गई है.

फैसले के राजनीतिक और प्रशासनिक मायने

इस निर्णय के बाद राजनीतिक गलियारों में इसकी व्याख्या अलग-अलग तरीके से की जा रही है. कुछ विशेषज्ञ इसे केंद्र और राज्य के बीच संस्थागत सहयोग बढ़ाने वाला कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे केवल प्रशासनिक प्रक्रिया में बदलाव के रूप में देख रहे हैं. अधिसूचना की भाषा से साफ है कि सरकार ने जांच एजेंसी को सीमित और परिभाषित अधिकार दिए हैं. ऐसे में राज्य के अधिकारियों से जुड़े मामलों में पुरानी व्यवस्था कायम रहेगी, जबकि केंद्र सरकार और केंद्रीय उपक्रमों से जुड़े मामलों में सीबीआई को अपेक्षाकृत अधिक आसानी से जांच करने का अवसर मिलेगा.