नई दिल्ली: भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या और बॉम्बे हाई कोर्ट के बीच कानूनी दांवपेच एक नए और दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गए हैं. माल्या ने बुधवार को अदालत को सूचित किया कि वह फिलहाल भारत लौटने की स्थिति में नहीं हैं. उन्होंने इसके पीछे इंग्लैंड की अदालतों के उन सख्त आदेशों का हवाला दिया, जो उन्हें देश छोड़ने से रोकते हैं. हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक माल्या स्वयं भारत नहीं आते, भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (FEO) के खिलाफ उनकी दलीलें नहीं सुनी जाएंगी.
विजय माल्या के वकीलों ने बुधवार को बॉम्बे हाई कोर्ट में अपनी मजबूरी जाहिर की. उन्होंने तर्क दिया कि माल्या के खिलाफ ब्रिटेन में चल रही कानूनी कार्यवाही के कारण वहां की अदालतों ने उनके यात्रा करने पर पाबंदी लगा रखी है. माल्या ने कहा कि इन प्रतिबंधों की वजह से वह यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि उनकी वतन वापसी कब संभव होगी. हालांकि अदालत इन दलीलों से संतुष्ट नजर नहीं आई और कानूनी प्रक्रिया का सख्ती से पालन करने पर जोर दिया.
मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखाद की पीठ ने माल्या की याचिका पर सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाया. पीठ ने दो टूक शब्दों में कहा- 'आपको वापस आना ही होगा. यदि आप वापस नहीं आ सकते. तो हम इस याचिका पर सुनवाई नहीं कर सकते.' अदालत ने स्पष्ट किया कि माल्या को अपनी मंशा साफ करनी होगी कि वह भारत आने के लिए तैयार हैं या नहीं. कोर्ट ने बिना उपस्थिति के सुनवाई करने के माल्या के तर्क को फिलहाल पूरी तरह खारिज कर दिया.
70 वर्षीय विजय माल्या 2016 से ब्रिटेन में रह रहे हैं और भारत में धोखाधड़ी व मनी लॉन्ड्रिंग के कई मामलों का सामना कर रहे हैं. उन्होंने दो याचिकाएं दायर की हैं- एक उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने के आदेश के खिलाफ और दूसरी 2018 के कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली. अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह याचिका खारिज नहीं कर रही है. बल्कि माल्या को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का एक और मौका दे रही है ताकि पूरी न्याय प्रक्रिया बनी रहे.
हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 18 फरवरी के लिए तय की है. कोर्ट ने माल्या को एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. जिसमें उन्हें स्पष्ट रूप से अपनी वापसी की योजना बतानी होगी. मुख्य न्यायाधीश ने पूछा- 'आप कब आएंगे? आपने पहले ही तर्क दिया है कि आप शारीरिक उपस्थिति के बिना सुनवाई के हकदार हैं. लेकिन पहले इसे हलफनामे में दर्ज करें.' अदालत ने चेतावनी दी कि माल्या को अदालती प्रक्रिया का अनुचित लाभ उठाने की अनुमति किसी भी हाल में नहीं दी जाएगी.