असम में विधानसभा चुनाव से पहले उथल-पुथल मचा है. प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेन बोरा बीजेपी में शामिल होने वाले है. इसी बीच कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने उनके पार्टी छोड़ने की बात को ज्यादा तवज्जोह नहीं दी. साथ ही उन्होंने हिमंत बिस्वा सरमा को असम का जिन्ना बताया है.
भूपेन बोरा ने चुनाव से पहले पार्टी को छोड़ा है, जिसे कांग्रेस के लिए घातक बताया जा रहा है. हालांकि गोगोई ने इसे महत्वहीन बताते हुए पार्टी की लड़ाई जारी रखने का ऐलान किया है. हालांकि बोरा के पार्टी बदलने के ऐलान के बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है.
गौरव गोगोई ने उन्होंने सरमा और बोरा के बीच कथित करीबी रिश्तों का जिक्र करते हुए कहा कि लंबे समय से ऐसी अफवाहें थीं, जिन्हें पार्टी ने नजरअंदाज करने की कोशिश की. गोगोई ने दावा किया कि कांग्रेस की गोपनीय बैठकों की जानकारी सरमा के करीबी एक पत्रकार तक कैसे पहुंचती थी, इसे समझा जा सकता है.
गोगोई ने सरमा के रियल एस्टेट साम्राज्य को उजागर करने का दावा किया है. साथ ही यह भी दावा किया कि इसी वजह से सरमा को जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे कदम उठाने पड़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले सरमा ने सार्वजनिक रूप से बोरा की एक महिला कांग्रेस नेता के साथ कथित दुर्व्यवहार की निंदा की थी, जिसकी जांच महिला आयोग कर रहा है. लेकिन अब सरमा बोरा को सबसे ईमानदार हिंदू नेता बता रहे हैं.
भूपेन बोरा ने 2021 से 2025 तक असम कांग्रेस के अध्यक्ष पद को संभाला है. उन्होंने पार्टी छोड़ने के पीछे का कारण बताते हुए कहा कि उन्होंने कांग्रेस को 32 साल दिए, लेकिन पार्टी में अपमान सहन नहीं कर सकते. बोरा ने एक घटना का जिक्र किया जहां उनकी नाक में चोट लगी और राहुल गांधी के सामने खून बहा.
उन्होंने एक महीने पहले गोगोई को पत्र लिखकर चेतावनी दी थी कि वह उनके खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. बोरा ने गोगोई पर पार्टी पर नियंत्रण न होने का आरोप लगाया और उन्हें मात्र चेहरा बताया. हालांकि चुनाव से पहले इस उठापटक से राज्य की राजनीति गरमा गई है.