चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा में विपक्ष पर तीखे हमले किए और अपनी राजनीतिक यात्रा को ऐतिहासिक संदर्भ देने की कोशिश की. उन्होंने 1967, 1977, 1982 और 2026 को क्रमशः अन्नादुरई, एमजीआर, एनटीआर और अपने नाम से जोड़कर चुनावी जीत को बड़े राजनीतिक बदलाव के रूप में पेश किया.
विधानसभा में विपक्ष पर लगातार निशाना साधने के बीच विजय ने एक छोटी लेकिन बेहद राजनीतिक लाइन कही—“1967, 1977, 1982, 2026 अन्ना, एमजीआर, एनटीआर, विजय.” इस बयान के जरिए उन्होंने अपनी 2026 की जीत को सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़े मोड़ के तौर पर पेश किया. उनका संकेत था कि जिस तरह पुराने राजनीतिक ढांचे को चुनौती देकर अन्नादुरई और एमजीआर ने नई ताकत खड़ी की, उसी तरह उनकी पार्टी भी स्थापित राजनीतिक व्यवस्था को बदलने की क्षमता रखती है.
1967 का चुनाव तमिलनाडु की राजनीति के लिए निर्णायक मोड़ माना जाता है. सीएन अन्नादुरई के नेतृत्व में डीएमके ने लंबे समय से राज्य की सत्ता पर काबिज कांग्रेस को हरा दिया और पहली बार द्रविड़ आंदोलन को सत्ता तक पहुंचाया. इसके बाद तमिलनाडु की राजनीति का केंद्र द्रविड़ दल बन गए और कांग्रेस फिर अपने दम पर सत्ता में नहीं लौट सकी. विजय ने इसी इतिहास को सामने रखते हुए संकेत दिया कि आज डीएमके खुद उस स्थापित राजनीतिक व्यवस्था का हिस्सा है, जिसे नई ताकत चुनौती दे रही है.
1977 में एमजी रामचंद्रन ने सिनेमा की लोकप्रियता को राजनीतिक ताकत में बदलने का उदाहरण पेश किया. डीएमके से अलग होने के बाद उन्होंने एआईएडीएमके बनाई और विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 234 में से 130 सीटें जीत लीं. इसके साथ एमजीआर मुख्यमंत्री बने और तमिलनाडु की राजनीति में डीएमके के सामने एक मजबूत दूसरा राजनीतिक ध्रुव तैयार हुआ. विजय का एमजीआर का नाम लेना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह भी अभिनेता से राजनेता बने हैं. उनके लिए एमजीआर का राजनीतिक सफर यह बताने का जरिया है कि लोकप्रियता को मजबूत संगठन में बदलकर लंबे समय तक चुनावी प्रभाव बनाया जा सकता है.
1982 में एनटी रामाराव ने तेलुगु देशम पार्टी की स्थापना कर आंध्र प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव किया. अगले वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में टीडीपी ने 294 में से 201 सीटें जीतकर कांग्रेस के लंबे दबदबे को समाप्त कर दिया. विजय ने अपने राजनीतिक सफर को इसी तरह के बदलावों की अगली कड़ी के रूप में पेश किया. अन्नादुरई ने कांग्रेस का वर्चस्व तोड़ा, एमजीआर ने द्रविड़ राजनीति में नया ध्रुव बनाया और एनटीआर ने नई पार्टी को तेजी से सत्ता तक पहुंचाया. अब विजय 2026 को इसी राजनीतिक बदलाव की अगली कड़ी बताकर अपनी पार्टी के लिए एक नए राजनीतिक दौर की तस्वीर खींच रहे हैं.