'संसद मार्च से जुड़े वीडियो सुरक्षित रखे जाएं', दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को दिए आदेश, लाठीचार्ज पर केंद्र से मांगा जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को 'चलो संसद' प्रदर्शन से जुड़े CCTV और वीडियो सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं. साथ ही केंद्र और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है.

@umashankarsingh
Sagar Bhardwaj

'चलो संसद' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस बल प्रयोग के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को महत्वपूर्ण आदेश जारी किया. अदालत ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि 20 और 21 जुलाई की घटनाओं से जुड़े सभी CCTV फुटेज, वीडियोग्राफी और अन्य संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं. साथ ही केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया. मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी.

'यह कोई अकेली घटना नहीं'

मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि याचिकाओं में लगाए गए आरोपों को किसी एक व्यक्ति की अलग-थलग शिकायत मानकर नहीं देखा जा सकता. अदालत ने संकेत दिया कि यदि मामला व्यापक सार्वजनिक महत्व का हो, तो केवल प्रभावित व्यक्तियों को निजी शिकायत दर्ज कराने की सलाह देना पर्याप्त नहीं है. हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस स्तर पर वह आरोपों की सत्यता या वायरल वीडियो की प्रमाणिकता पर कोई राय नहीं दे रही है, बल्कि केवल संबंधित पक्षों से उनका पक्ष जानना चाहती है.

याचिकाकर्ताओं ने लगाए गंभीर आरोप

जनहित याचिकाओं में दावा किया गया कि पेपर लीक के विरोध में आयोजित प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया. याचिकाकर्ताओं के अनुसार, प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस, इलेक्ट्रिक बैटन और शारीरिक बल का इस्तेमाल किया गया. आरोप यह भी लगाया गया कि 90 से अधिक लोग घायल हुए और कुछ महिला प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार हुआ. याचिका में संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, विशेष जांच दल (SIT) गठित करने, बॉडी कैमरा फुटेज सुरक्षित रखने और प्रदर्शनकारियों को किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण देने की मांग की गई है.


सरकार ने किया आरोपों का विरोध, दूसरी याचिका खारिज

केंद्र और दिल्ली पुलिस की ओर से अदालत में कहा गया कि प्रदर्शन हिंसक हो गया था, कुछ प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया और उस समय क्षेत्र में धारा 144 लागू थी. सरकार ने यह भी तर्क दिया कि यदि किसी के साथ मारपीट हुई है तो वह सामान्य कानूनी प्रक्रिया के तहत शिकायत दर्ज करा सकता है. हालांकि हाईकोर्ट ने इस दलील को फिलहाल स्वीकार नहीं किया और विस्तृत जवाब मांगा. इसी दौरान अदालत ने सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाए जाने की स्वतंत्र जांच की मांग वाली एक अलग जनहित याचिका खारिज कर दी. अदालत ने कहा कि इस मुद्दे को पहले ही वांगचुक की पत्नी द्वारा दायर याचिका में उठाया जा चुका है और यदि किसी को अब भी शिकायत है तो वह उपलब्ध कानूनी उपायों का सहारा ले सकता है.