नई दिल्ली: वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय बजट पेश होने के साथ ही सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. निर्मला सीतारमण ने आज रविवार को संसद में बजट रखा. इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के रिएक्शन सामने आने लगे हैं. किसी ने इसे भविष्य की नींव बताया तो किसी ने आम जनता के लिए निराशाजनक करार दिया है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी बजट पर अपना रिएक्शन साझा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. उन्होंने कहा कि इस बजट में बंगाल को कुछ भी नहीं दिया गया.
ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि बजट में किसी स्पष्ट दिशा की कमी है. उन्होंने आर्थिक गलियारे के ऐलान पर तंज कसते हुए इसे कचरा तक कह दिया. उनका कहना था कि इस तरह की घोषणाओं से राज्यों की असली जरूरतें पूरी नहीं होतीं.
कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने बजट की आलोचना की है. कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि सरकार देश की अर्थव्यवस्था को गर्त में ले जाकर ही मानेगी. कांग्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से भी सरकार पर हमला बोला और दावा किया कि बजट के बाद शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली. विपक्ष का आरोप है कि बजट में आम आदमी की समस्याओं का समाधान नहीं है.
वहीं दूसरी ओर बीजेपी और एनडीए नेताओं ने बजट को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया है. गृह मंत्री अमित शाह ने बजट को विकसित भारत की दिशा में मजबूत कदम बताया. उन्होंने कहा कि यह बजट भारत को एक ऐसे देश के रूप में पेश करता है जो अपनी ताकत पर भरोसा करते हुए आगे बढ़ रहा है.
अमित शाह ने अपने बयान में कहा कि कोरोना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी आर्थिक नीतियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार दी है. उनके मुताबिक बजट 2026 इस रफ्तार को और तेज करेगा. इससे भारत पारंपरिक क्षेत्रों के साथ साथ नए दौर के क्षेत्रों में भी वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति मजबूत कर सकेगा.
बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने भी बजट का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि यह एक अच्छा बजट है लेकिन विपक्ष बिना पढ़े ही अपनी प्रतिक्रिया तैयार कर लेता है. उनका कहना था कि बजट पर टिप्पणी करने से पहले विपक्ष को इसे ध्यान से पढ़ना चाहिए.
एक तरफ सत्ता पक्ष बजट को विकसित भारत का रोडमैप बता रहा है तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे दिशाहीन करार दे रहा है. यह टकराव दिखाता है कि बजट 2026 केवल आर्थिक दस्तावेज नहीं बल्कि एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है. राज्यों को मिलने वाले हिस्से और क्षेत्रीय संतुलन को लेकर बहस और तेज हो गई है.
ममता बनर्जी के बयान के बाद यह सवाल फिर से उठने लगे हैं कि क्या केंद्र सरकार सभी राज्यों के साथ समान व्यवहार कर रही है. बंगाल को लेकर उनके आरोपों ने पूर्वी भारत के विकास और केंद्रीय योजनाओं में हिस्सेदारी की चर्चा को हवा दी है. आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है.