नई दिल्ली: केंद्रीय बजट 2026 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने महिला उद्यमिता को लेकर भी एक घोषणा की है. सरकार अब महिलाओं को केवल क्रेडिट आधारित रोजगार तक सीमित नहीं रखना चाहती बल्कि उन्हें अपने खुद के एंटरप्राइज का मालिक बनाने की दिशा में आगे बढ़ाना चाहती है. इस सोच के तहत बजट में कई नई पहलें सामने रखी गई हैं.
वित्त मंत्री ने बताया कि यह प्रस्ताव लखपति दीदी कार्यक्रम की सफलता से प्रेरित है. इस कार्यक्रम के जरिए देशभर में लाखों महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं. महिलाओं की आय बढ़ी है और उन्होंने छोटे व्यवसायों के जरिए अपनी पहचान बनाई है. सरकार अब इसी मॉडल को अगले स्तर पर ले जाना चाहती है.
बजट 2026 में शी मार्ट्स नाम की एक नई पहल की घोषणा की गई है. ये ऐसे रिटेल आउटलेट होंगे जो सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़ी महिला उद्यमियों द्वारा चलाए जाएंगे. इनका स्वामित्व भी समुदाय के पास होगा. यानी महिलाएं न केवल यहां काम करेंगी बल्कि फैसले लेने और मुनाफे में हिस्सेदारी की भी हकदार होंगी.
शी मार्ट्स को क्लस्टर स्तर पर विकसित किया जाएगा. इसका मतलब ये है कि एक क्षेत्र की कई महिला उद्यमी मिलकर इन रिटेल आउटलेट्स को चलाएंगी. इससे लागत कम होगी, संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और महिलाओं को बाजार तक सीधी पहुंच मिलेगी. यह मॉडल छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में खास तौर पर कारगर माना जा रहा है.
वित्त मंत्री ने कहा कि महिला उद्यमियों को बेहतर और इनोवेटिव फाइनेंसिंग विकल्प उपलब्ध कराए जाएंगे. अब तक महिलाएं अधिकतर लोन आधारित मॉडल पर निर्भर रही हैं. नई पहल के तहत उन्हें इक्विटी और मालिकाना हक से जुड़े विकल्प भी मिलेंगे. इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे अपने कारोबार को लंबे समय तक चला सकेंगी.
सरकार का मानना है कि असली सशक्तिकरण तब होता है जब व्यक्ति सिर्फ काम करने वाला नहीं बल्कि फैसले लेने वाला भी बने. शी मार्ट्स और एंटरप्राइज ओनरशिप की यह पहल महिलाओं को इसी दिशा में आगे ले जाएगी. इससे वे केवल आमदनी कमाने तक सीमित नहीं रहेंगी बल्कि बिजनेस लीडर के रूप में उभरेंगी.
इस पहल का सीधा असर ग्रामीण और अर्ध शहरी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा. सेल्फ हेल्प ग्रुप पहले से ही गांवों में मजबूत नेटवर्क बना चुके हैं. शी मार्ट्स के जरिए इन समूहों को एक स्थायी बाजार मिलेगा. इससे स्थानीय उत्पादों को पहचान मिलेगी और गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. आर्थिक आत्मनिर्भरता का असर महिलाओं की सामाजिक स्थिति पर भी पड़ता है. जब महिलाएं अपने कारोबार की मालिक बनेंगी तो परिवार और समाज में उनकी भूमिका और मजबूत होगी. फैसलों में उनकी भागीदारी बढ़ेगी और वे आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनेंगी.