बजट 2026: मोदी सरकार के 14 बजटों में टैक्सपेयर्स को कब-क्या मिला, इस बार क्या हैं उम्मीदें?
मोदी सरकार के 2014 से अब तक के बजटों में टैक्सपेयर्स के लिए कई बड़े बदलाव आए हैं. इनमें टैक्स स्लैब में राहत, डिडक्शन लिमिट बढ़ाना और नई योजनाएं शामिल हैं. आगामी 2026 बजट में ICAI के सुझावों पर नजर है, जैसे डबल इनकम और सिंगल आईटीआर.
नई दिल्ली: 1 फरवरी 2026 को वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश होने वाला है. यह मोदी 3.0 का तीसरा बजट होगा और 2014 से अब तक का 15वां. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण नौवीं बार इसे पेश करेंगी. हर क्षेत्र को उम्मीदें हैं, खासकर मध्यम वर्ग को टैक्स में और छूट की. पिछले 14 बजटों में सरकार ने टैक्स दाताओं के लिए क्या-क्या कदम उठाए और इन ऐलानों ने किस तरह आयकर व्यवस्था को सरल बनाया? आइये जानते हैं.
मोदी सरकार के गठन के पहले साल,यानि 2014 के बजट में बेसिक छूट सीमा 2 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये की गई. सीनियर सिटीजन के लिए यह 3 लाख हुई. सेक्शन 80सी की लिमिट 1.1 लाख से 1.5 लाख और होम लोन ब्याज पर छूट 1.5 लाख से 2 लाख रुपये हुई. 2015 में एनपीएस निवेश पर 50 हजार की छूट आई, हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम लिमिट बढ़ी और वेल्थ टैक्स खत्म हुआ.
मध्य वर्षों की राहतें
2016 में टैक्स रिबेट 5 हजार रुपये हुई, सरचार्ज बढ़ा और किराया छूट 60 हजार तक पहुंची. 2017 में 2.5-5 लाख आय पर टैक्स 5% हुआ, रिबेट 12,500 दिया गया. 2018 में स्टैंडर्ड डिडक्शन 40 हजार लाया गया, सीनियर के लिए ब्याज छूट 50 हजार हुई और एलटीसीजी पर 10% टैक्स लगा. 2019 में रिबेट बढ़ाकर 5 लाख तक आय टैक्स फ्री हुई.
हाल के बजटों में सुधार
2020 में नई टैक्स व्यवस्था आई, जहां कई छूट हटीं लेकिन स्लैब सरल हुए. डीडीटी खत्म हुआ. 2021 में 75 साल से ऊपर बुजुर्गों को आईटीआर से मुक्ति मिली, ईपीएफ ब्याज पर लिमिट लगी. 2022 में क्रिप्टो पर 30% टैक्स और 1% टीडीएस आया. 2023 में रिबेट से 7 लाख तक आय टैक्स फ्री हुई, स्लैब घटे.
नवीनतम ऐलान और भविष्य
2024 में स्टैंडर्ड डिडक्शन 75 हजार हुआ, स्लैब बदले और पेंशन छूट बढ़ी. 2025 में 12 लाख तक आय टैक्स फ्री बनी, स्लैब में राहत आई और सीनियर के लिए ब्याज छूट दोगुनी हुई. एलआरएस पर टीसीएस लिमिट 10 लाख हुई. 2026 बजट के लिए आईसीएआई ने डबल इनकम, सिंगल आईटीआर जैसे सुझाव दिए हैं.
इन बदलावों से टैक्स सिस्टम सरल हुआ, मध्यम वर्ग को फायदा मिला. सरचार्ज, टीडीएस जैसे कदमों से राजस्व बढ़ा. अब 2026 में और राहत की उम्मीद है, जैसे टैक्स स्लैब में और बदलाव या नई छूटें. सरकार का फोकस विकास पर है, लेकिन टैक्सदाताओं की जेब का भी ख्याल रखना जरूरी है.
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