डॉक्टरों, नर्सों को 100,000 डॉलर की H-1B वीजा फीस से मिल सकती है राहत, अमेरिकी संसद में पेश हुआ बिल

अमेरिका में द्विदलीय सांसदों ने विदेशी डॉक्टरों और नर्सों के लिए 100,000 डॉलर की H-1B वीज़ा फीस माफ करने का बिल पेश किया है. इस कदम का उद्देश्य अमेरिका में बढ़ते स्वास्थ्यकर्मियों के संकट को दूर करना है, खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां विदेशी डॉक्टरों पर निर्भरता ज्यादा है.

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Sagar Bhardwaj

अमेरिका में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में काम करने की इच्छा रखने वाले विदेशी डॉक्टरों और नर्सों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. यहां के सांसदों के एक द्विदलीय समूह ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में एक बिल पेश किया है, जिसमें इन पेशेवरों पर लगने वाला 100,000 डॉलर का H-1B वीजा शुल्क माफ करने की मांग की गई है. यह शुल्क साल 2025 में राष्ट्रपति ट्रंप के प्रशासन द्वारा लगाया गया था और तभी से यह विवादों में है. अब इस बिल के जरिए अमेरिका में बढ़ते स्वास्थ्य संकट से निपटने की कोशिश की जा रही है.

कानूनी चुनौटी और विवादित फीस

ट्रंप प्रशासन द्वारा सितंबर 2025 में लगाया गया 100,000 डॉलर का यह शुल्क शुरू से ही विवादों में रहा है. नर्सिंग यूनियनों और अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स ने इसके खिलाफ कानूनी चुनौती पेश की है. आलोचकों का कहना है कि यह फीस अवैध है और इससे स्वास्थ्य सेवा में पहले से मौजूद कर्मचारियों की कमी और गहरा सकता है. द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह भारी शुल्क अस्पतालों को विदेशी पेशेवरों को हायर करने से रोक रहा है, जिसका सीधा असर मरीजों की देखभाल पर पड़ रहा है.

अमेरिका में स्वास्थ्य संकट के आसार

इस बिल की असली वजह अमेरिका में गहराता हेल्थकेयर वर्कर का संकट है. अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के अनुमान के मुताबिक, 2036 तक अमेरिका में 86,000 डॉक्टरों की कमी हो सकती है. नर्सिंग के क्षेत्र में भी स्थिति गंभीर है. साल 2022 के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका के 3 मिलियन रजिस्टर्ड नर्सों में से 500,000 यानी करीब 16 फीसदी प्रवासी थे. यह आंकड़ा साफ करता है कि अमेरिकी स्वास्थ्य सेवा कितनी हद तक विदेशी कर्मचारियों पर निर्भर है.

ग्रामीण इलाकों पर मंडराता खतरा

सबसे ज्यादा खतरा अमेरिका के ग्रामीण इलाकों पर है, जहां मरीजों की देखभाल के लिए ज्यादातर विदेशी डॉक्टर और नर्स ही भरोसे का सहारा हैं. इन इलाकों में स्थानीय प्रतिभा मिलना बेहद मुश्किल है. अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन ने पहले ही सरकार से हेल्थकेयर वर्कर्स को इस भारी फीस से छूट देने की मांग की थी. एएमए प्रेसिडेंट बॉबी मुक्कामाला का कहना है कि अगर यह फीस वापस नहीं हुई, तो फ्लिंट, मिशिगन जैसे उनके शहर और दूसरे ग्रामीण समुदायों में मरीजों की देखभाल के लिए डॉक्टर नहीं बचेंगे.

राजनीतिक द्वंद्व और नई उम्मीद

H-1B वीजा प्रोग्राम अमेरिका में हमेशा से एक राजनीतिक मुद्दा रहा है. आलोचकों का कहना है कि इससे अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी लिए जाते हैं, लेकिन हेल्थकेयर सेक्टर में स्थिति अलग है. ग्रामीण अस्पतालों के लिए यह प्रोग्राम जीवन रेखा की तरह है. रिपब्लिकन माइक लॉलर और डेमोक्रेट सैनफोर्ड बिशप जूनियर द्वारा पेश किया गया यह नया बिल इस बात की मान्यता है कि विदेशी डॉक्टरों पर रोक लगाना समस्या का हल नहीं, बल्कि उसे और गहरा करना है. इस बिल के जरिए अब ग्रामीण अमेरिका को स्वास्थ्य संकट से बचाने की उम्मीद जगी है.