बजट में निर्मला सीतारमण की साड़ियां क्यों रहती है चर्चा में? जानिए इसके पीछे छुपा संदेश

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जब भी यूनियन बजट पेश करती हैं, तो उनके ऐलानों के साथ उनकी साड़ी भी लोगों का ध्यान खींचती है. वह हर साल हाथ से बुनी साड़ी पहनती हैं, जो किसी न किसी राज्य की कला और परंपरा से जुड़ी होती है.

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Reepu Kumari

1 फरवरी को पेश होने वाला यूनियन बजट देश के हर वर्ग के लिए अहम होता है. टैक्सपेयर्स, किसान, उद्योग, महिलाएं और युवा सभी की नजरें बजट पर रहती हैं. इस दिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जब संसद पहुंचती हैं, तो उनका पहनावा भी चर्चा का विषय बन जाता है.

निर्मला सीतारमण हर साल हाथ से बुनी साड़ी पहनती हैं. ये साड़ियां सिर्फ कपड़ा नहीं होतीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और क्षेत्रीय गौरव को दिखाती हैं. हर बजट के साथ उनकी साड़ी का रंग, डिजाइन और राज्य एक खास संदेश देता नजर आता है.

बजट 2025 की खास साड़ी

1 फरवरी 2025 को निर्मला सीतारमण गोल्डन बॉर्डर वाली ऑफ-व्हाइट साड़ी में नजर आईं. इस साड़ी पर मधुबनी प्रिंट था. यह साड़ी बिहार की प्रसिद्ध मधुबनी कलाकार दुलारी देवी ने उन्हें भेंट की थी. उन्होंने यह साड़ी मिथिला आर्ट इंस्टीट्यूट की यात्रा के दौरान दी थी और बजट के दिन पहनने का अनुरोध किया था.

2024 और 2023 की झलक

यूनियन बजट 2024 में वित्त मंत्री ने ऑफ-व्हाइट मंगलागिरी साड़ी पहनी थी, जिसका गहरा गुलाबी बॉर्डर था. यह साड़ी आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले की पहचान है. बजट 2023 में उन्होंने काले और सुनहरे बॉर्डर वाली लाल सिल्क साड़ी पहनी, जिस पर रथ, मोर और कमल जैसे पारंपरिक डिजाइन बने थे.

2022 और 2021 का संदेश

2022 के बजट में निर्मला सीतारमण ने ओडिशा की गहरी भूरी बोमकाई साड़ी पहनी थी, जिसमें सिल्वर जरी का काम था. 2021 में उन्होंने तेलंगाना की रंगीन पोचमपल्ली इकत साड़ी पहनी, जिसमें लाल, हरा और ऑफ-व्हाइट रंग शामिल थे. यह समय कोविड संकट का था और रंग उम्मीद दिखाते थे.

2020 और पहली बजट साड़ी

2020 में वित्त मंत्री चमकीली पीली सिल्क साड़ी में नजर आईं, जिसमें नीला बॉर्डर था. पीला रंग उम्मीद और नई शुरुआत का संकेत था. 2019 में अपने पहले बजट के दौरान उन्होंने गुलाबी मंगलागिरी साड़ी पहनी और ब्रीफकेस की जगह बही-खाता अपनाया.

साड़ी से जुड़ा सांस्कृतिक संदेश

निर्मला सीतारमण की साड़ियां यह दिखाती हैं कि बजट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है. यह भारत की संस्कृति, परंपरा और लोगों से जुड़ा दस्तावेज भी है. उनकी हर साड़ी देश की किसी न किसी कला को सम्मान देती है.