नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के कुछ घंटों पहले ही ईरान में एक बड़ा हमला हुआ है. ईरानी मीडिया के अनुसार हमले का निशाना देश का सबसे बड़ा साउथ पार्स नैचुरल गैस फील्ड और असलुयेह का पेट्रोकेमिकल संयंत्र रहा. इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह ईरान के पेट्रोकेमिकल उत्पादन को भारी नुकसान पहुंचाने वाला हमला था. ईरान ने इस हमले के लिए अमेरिका और इजरायल दोनों को जिम्मेदार ठहराया है. इस घटना से मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है.
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान को चेतावनी दी थी कि इस हफ्ते बिजली संयंत्रों और पुलों पर हमले हो सकते हैं. ठीक उसी समय ईरान के दक्षिणी बुशहर प्रांत के असलुयेह इलाके में साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर हमला हुआ. ईरानी मीडिया फार्स न्यूज और मिजान न्यूज एजेंसी ने रिपोर्ट दी कि ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया गया. इजरायल ने ईरान के तीन एयरपोर्ट्स पर भी हमले किए. दोनों देशों ने अभी तक अमेरिका पर सीधा आरोप नहीं लगाया है, लेकिन ईरान का कहना है कि यह हमला ट्रंप की धमकी के ठीक बाद हुआ है.
इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने सोमवार को स्पष्ट रूप से हमले की पुष्टि की. उन्होंने कहा कि इजरायल ने असलुयेह स्थित ईरान के सबसे बड़े पेट्रोकेमिकल संयंत्र पर जबरदस्त हमला किया है. यह संयंत्र देश के कुल पेट्रोकेमिकल उत्पादन का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा तैयार करता है. काट्ज ने इसे एक प्रमुख लक्ष्य बताया. मार्च में भी इजरायल ने साउथ पार्स क्षेत्र में सुविधाओं पर हमला किया था, जिसके बाद ईरान ने पश्चिम एशिया के कई तेल और गैस स्थलों को निशाना बनाना शुरू कर दिया था.
ईरान ने हमले के लिए सीधे अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है. फार्स न्यूज एजेंसी ने बताया कि साउथ पार्स गैस फील्ड में ऊर्जा ठिकानों को नुकसान पहुंचाया गया. ईरान का कहना है कि यह हमला जानबूझकर किया गया है. इस घटना से पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की चेतावनी और इजरायल के हमले के बीच का समय संयोग नहीं हो सकता. फिलहाल दोनों तरफ से और हमलों की आशंका जताई जा रही है.
यह हमला अमेरिका-ईरान तनाव को एक नए स्तर पर ले गया है. साउथ पार्स दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस फील्ड है, जिस पर हमला ईरान की अर्थव्यवस्था को भारी झटका दे सकता है. इजरायल के रक्षा मंत्री के बयान से साफ है कि इजरायल ईरान की ऊर्जा सुविधाओं को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहा है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अब इस हमले के प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ गई है. तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव की आशंका है.